गुजरात और उत्तराखंड में फॉर्मूला हुआ हिट, हिमाचल प्रदेश में कहां चूक गई भाजपा

हाल में ही हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए। गुजरात में जहां भाजपा ने एकतरफा जीत हासिल की है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में उसे अपनी सत्ता गंवानी पड़ी है। यह भाजपा के लिए बड़ा झटका है। लेकिन गुजरात में भाजपा ने जहां दमदार प्रदर्शन किया तो वहीं हिमाचल में उसे झटका क्यों लगा, यह सबसे बड़ा सवाल है। सवाल यह भी है कि क्या हिमाचल में कोई बड़ी चूक भाजपा कर गई? इसको लेकर तरह-तरह की बाते कहीं जा रही है। दावा यह भी किया जा रहा है कि सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी हो गई थी। भ्रष्टाचार बढ़ गया था और यही कारण है कि जयराम ठाकुर सरकार के 10 में से 8 मंत्री खुद चुनाव हार गए हैं।

उत्तराखंड और गुजरात में भी चुनाव से पहले भाजपा के भीतर कई उठापटक के दौर देखने को मिला। दोनों ही राज्यों में चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री का बदलाव कर दिया गया। इतना ही नहीं, कैबिनेट का भी बदलाव किया गया। पुराने मुख्यमंत्री को हटाकर नए चेहरे को आगे लाया गया। उत्तराखंड में इसका लाभ मिला। छोटे राज्य में पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा जीतने में कामयाब रही। गुजरात में भी भाजपा की ओर से यह दांव खेला गया। विजय रुपाणी और उनके कैबिनेट को हटाया गया और फिर भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ। लेकिन हिमाचल प्रदेश में एक काम भाजपा नहीं कर सकी।

हिमाचल प्रदेश में जयराम ठाकुर के ही नेतृत्व में भाजपा चुनावी मैदान में उतरी थी। भाजपा का यह दांव पार्टी पर उल्टा पड़ गया। पार्टी के लिए इस हार को पचा पाना इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा हिमाचल प्रदेश से ही आते हैं। भले ही जयराम ठाकुर 5 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे लेकिन प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार की तरह लोगों के बीच लोकप्रिय नहीं हो सके। इसके अलावा पार्टी की ओर से बागियों को साधने की जो कोशिश थी, वह नाकाम रही। पार्टी के लगभग 21 बागी उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे जिसकी वजह से भाजपा को हार मिली है।