असम में घुसपैठ की घटनाओं में आई भारी कमी : अमित शाह

गुवाहाटी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को खानापाड़ा में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने ‘भारत माता की जय’ के जमकर नारे लगवाए। उन्होंने कहा कि 2014 में असम में हमारे पास सिर्फ 5 सीटें थीं। 2016 में नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हम चुनाव लड़ा। तब 30 फीसदी वोटों के साथ 60 सीटों के साथ हमने सरकार बनाई। 2021 में हमने पूर्ण बहुमत की भाजपा की सरकार बनाई, आज उस सरकार का 1 साल पूरा हो रहा है।

उन्होंने कहा कि एक साल के समारोह में बारिश के बीच लाखों की संख्या में जो लोग खड़े हैं वो बताया है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक साल में असम को बदलने की प्रक्रिया की है और उन्हें असम की जनता का आशीर्वाद प्राप्त है।

गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा की सरकार बनने के पहले असम आतंकवाद, आंदोलन, बम धमाके, गोलीबारी से ग्रसित राज्य था। भाजपा सरकार के 6 वर्षों में असम में आतंकवाद, आंदोलन, हिंसा की जगह, शांति, विकास और बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा का रास्ता प्रशस्त हुआ है।

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कई पुरानी समस्याओं का समाधान भाजपा ने किया है। हमने सबसे बड़ा काम एक साल में घोषणापत्र में मौजूद ढेर सारे वादे पूरे करने का किया है। हमने 2 लाख लोगों को सरकारी नौकरी देने का वादा किया था। इसके लिए 2 भर्ती आयोग गठित हो गए हैं और हमने 23 हजार से अधिक लोगों को नौकरी देने का काम हमने सिर्फ एक साल में पूरा किया है।

गृह मंत्री ने कहा कि हमने वादा किया था कि हम असम से घुसपैठ को रोकेंगे। बांग्लादेश की सीमा पर कल ही मैं दौरा करके आया हूं। सारे आंकड़े बताते हैं कि असम में घुसपैठ की घटनाओं पर बहुत ज्यादा कमी आई है। कुछ समय के बाद ये घुसपैठ पूरी तरह से बंद हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि असम सरकार को मैं कोविड मैनेजमेंट की भी बधाई देता हूं। टीका आने से पहले ऑक्सीजन से लेकर सारी सुविधाओं की व्यवस्था करना और टीका आने के बाद जंगल हो या पहाड़ी क्षेत्र, गांव हो या शहर, टीकाकरण अभियान यहां सफल हुआ है। कोविड के खिलाफ असम ने मजबूती से लड़ाई लड़ी है।

इसी बीच उन्होंने कहा कि असम में हमने हिंसा, अलगावाद और उग्रवाद के खिलाफ जीरो टॉररेंस की नीति अपनाई है। युवाओं की आकांक्षाओं के अनुरूप विकास, प्रगति और शिक्षा के नए युग की शुरुआत की है। उग्रवादी संगठन के साथ गई समझौते हुए, 9,000 से ज्यादा उग्रवादी हथियार डालकर आज मुख्यधारा में शामिल हुए हैं।