वाशिंगटन में पाक राजदूत के विदाई भोज कार्यक्रम में हुई बातचीत ने इमरान खान का संकट बढ़ाया था

इस्लामाबाद| पाकिस्तान में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान नीत सरकार का संकट बढ़ाने वाली ‘बातचीत’ अमेरिका में पाक राजदूत असद मजीद खान के वाशिंगटन स्थित आवास में उनके विदाई भोज कार्यक्रम में हुई थी। मीडिया में रविवार को आई एक खबर में यह कहा गया है। पाकिस्तानी राजदूत के इस आवास को पाकिस्तान हाउस के नाम से भी जाना जाता है।

डॉन अखबार ने राजनयिक एवं आधिकारिक सूत्रों के हवाले से अपनी खबर में कहा है कि दोपहर के भोजन पर हुई बैठक में ‘नोट’ लिखने वाले एक व्यक्ति भी शरीक हुए थे और बाद में राजदूत खान ने जो ‘केबल’ (पत्र) इस्लामाबाद भेजा था, वह लिखे गये ‘नोट’ पर आधारित था। बैठक में दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लु और उप विदेश मंत्री लेसली सी विगुइरे भी शामिल हुए थे।

चूंकि, यह बैठक यूक्रेन पर रूस के हमला शुरू करने के दो हफ्ते से भी कम समय बाद हुई थी, इसलिए रूसी आक्रमण का विषय बातचीत में छाया रहा था।

अखबार के मुताबिक, सूत्रों ने कहा कि अमेरिकी पक्ष ने तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को उस दिन मास्को भेजने के पाकिस्तान के फैसले पर नाराजगी जताई, जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था। एक सूत्र ने कहा, ‘‘उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि आक्रमण ने पूरे अमेरिका को आक्रोशित कर दिया और विस्तार से बताया कि क्यों उन्होंने सोचा कि इमरान खान को अपनी यात्रा टाल देनी चाहिए थी। ’’

एक अन्य सूत्र लु ने कहा, ‘‘वाशिंगटन का मानना है कि आक्रमण के बावजूद यात्रा पर जाने के बारे में अंतिम फैसला इमरान खान का था, हालांकि कुछ पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे स्थगित करने का सुझाव दिया था। ’’ इन सूत्रों के मुताबिक राजदूत खान ने दलील दी कि यह एक सामूहिक फैसला था और पाकिस्तान वर्षों से मास्को की यात्रा के लिए कोशिश कर रहा था। और जब न्योता आया, तब वे इसे ठुकरा या स्थगित नहीं कर सकें। ’’ अखबार में कहा गया है कि हालांकि, अमेरिकियों ने दलील दी है कि इस्लामाबाद को यात्रा के इस मुद्दे पर आगे बढ़ने से पहले अमेरिका की भावनाओं पर विचार करना चाहिए था।

सूत्रों ने कहा कि उस बातचीत ने फिर पाकिस्तान में मौजूदा राजनीतिक संकट को गहरा दिया और लु ने इस बात का जिक्र किया कि वाशिंगटन स्थिति पर नजर रखे हुए था तथा तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के कदम के नतीजों का असर अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों पर भी पड़ेगा।

एक सूत्र ने दावा किया कि लु की दलीलें सतर्क करने वाली और नियमित क्रियाकलाप से कोसों दूर हैं लेकिन उन्होंने सत्ता परिवर्तन की धमकी नहीं दी थी। सूत्र ने यह दावा भी किया कि बैठक में शामिल हुए किसी भी व्यक्ति को ऐसा नहीं लगता है कि अमेरिकी पाकिस्तान में इमरान खान नीत सरकार को सत्ता से बेदखल करने की साजिश कर रहा था। उन्होंने कहा, ‘‘नहीं, कोई साजिश नहीं थी। किसी को ऐसा नहीं लगता। लेकिन वे कहेंगे कि इसके परिणाम द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करेंगे, जो किसी न किसी रूप में मतलब निकाला जा सकता है। ’’

सूत्रों ने कहा कि अमेरिकियों ने इमरान खान की मास्को यात्रा को लेकर पाकिस्तान के साथ अपनी नाराजगी कभी नहीं छिपाई थी। उन्होंने दावा किया कि पाक सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने अप्रैल में वाशिंगटन की यात्रा करने की योजना बनाई थी लेकिन यूक्रेन के बारे में अमेरिकियों की भावनाओं के बारे में जानने के बाद उन्होंने इसे स्थगित कर दिया था।

एक अन्य सूत्र ने कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं सोचा कि यह एक अमेरिकी साजिश थी, लेकिन इसने कुछ प्रतिक्रिया की शुरूआत कर दी जिसने पाकिस्तान में घरेलू राजनीतिक स्थिति को प्रभावित किया।’’ सूत्र ने दावा किया कि दोपहर के भोजन पर हुई बैठक मेंरक्षा अताशे की उपस्थिति और यूक्रेन मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उनकी पूर्व की बातचीत से यह पता चलता है कि यूक्रेन पर जनरल बाजवा की टिप्पणी इस मुद्दे पर इमरान खान की नीतियों से कितनी हट कर थी। खान ने दलील दी थी कि पाकिस्तान ने शीत युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों के साथ शामिल होकर एक गलती की थी और उसे रूस-यूक्रेन संघर्ष में तटस्थ रहना चाहिए तथा मास्को के आक्रमण की निंदा करने से इनकार कर दिया।

हालांकि, जनरल बाजवा ने दो अप्रैल को इस्लामाबाद में एक सेमिनार को संबोधित करते हुए यूक्रेन पर रूसी हमले की आलोचना की थी। पिछले हफ्ते सेना ने भी अमेरिकी साजिश की बात खारिज कर दी थी, हालांकि यह स्वीकार किया कि वाशिंगटन ने दोपहर के भोजन पर हुई बैठक में जो इस्तेमाल की वह पाकिस्तानी मामलों में हस्तक्षेप के समान है। इमरान खान ने एक बयान में डोनाल्ड लु का नाम लिया था जिन्होंने राजदूत खान के साथ एक बैठक में कथित तौर पर धमकी दी थी।