अब भारत भरेगा दुनिया का पेट, मिस्र ने गेहूं आपूर्तिकर्ता के रूप में दी मंजूरी

श्रीलंका से लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान से लेकर अफ्रीका के कई देश इन दिनों खाद्य संकट से जूझ रहे हैं। महंगाई और कम उत्पादन की वजह से कई देशों में अनाज का संकट गहराया जा रहा है। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि अगर विश्व व्यापाक संगठन की तरफ से रजामंदी मिलती है तो दुनिया को अनाज की आपूर्ति के लिए भारत तैयार है। पीएम मोदी ने ये बातें अमेरिकी राष्ट्रपति से खुद कही थी जिसे जो बाइडेन ने खुद ही साझा किया। इन सब के बीच मिस्र ने भारत को गेंहू आपूर्तिकर्ता के रूप में मंजूरी दे दी है। केंद्रीय कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्री पीयूष गोयल ने इसकी जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा कि मिस्र ने भारत को गेहूं आपूर्तिकर्ता के रूप में मंजूरी दी। हमारे किसानों ने सुनिश्चित किया है कि हमारे अन्न भंडार अतिप्रवाहित हों और हम दुनिया की सेवा के लिए तैयार हैं।

पीयूष गोयल ने कहा कि मोदी सरकार ने कदम उठाए हैं क्योंकि दुनिया स्थिर खाद्य आपूर्ति के लिए विश्वसनीय वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में है। गोयल ने ट्वीट किया, ‘‘भारतीय किसान दुनिया का पेट भर रहे हैं। मिस्र ने भारत को गेहूं आपूर्तिकर्ता के तौर पर मंजूरी दी है। दुनिया सतत खाद्य आपूर्ति के भरोसेमंद वैकल्पिक स्रोत की खोज में है ऐसे में मोदी सरकार आगे आई है। हमारे किसानों ने भंडारों को भरा रखा और हम दुनिया की सेवा करने के लिए तैयार हैं।’’

बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों में गेहूं की उपलब्धता में तेजी से गिरावट आई है। ये दोनों ही देश गेहूं के प्रमुख उत्पादक और निर्यातक हैं। मिस्र ने 2020 में रूस से 1.8 अरब डॉलर का और यूक्रेन से 61.08 करोड़ डॉलर के गेहूं का आयात किया था। अब मिस्र भारत से 10 लाख टन गेहूं का आयात करना चाहता है और अप्रैल में उसे 2,40,000 टन गेहूं की आवश्यकता होगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अनाज के भंडारण में भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है। अमेरिका की फॉरेन एग्रीकल्चर सर्विस (एफएएस) के मुताबिक, दुनिया में सबसे ज्यादा चावल और गेहूं का उत्पादन चीन के बाद भारत में होता है।