यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए संचालित की गईं 90 उड़ानें, PM मोदी दैनिक आधार पर कर रहे थे समीक्षा : विदेश मंत्री

नयी दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के दूसरे दिन विदेश मंत्री एस जयंशकर ने उच्च सदन में ऑपरेशन गंगा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गंभीर संघर्ष से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद हमने सुनिश्चित किया कि लगभग 22,500 भारतीय नागरिक सुरक्षित भारत लौट पाए। इस दौरान उन्होंने उड़ानों के बारे में भी जानकारी दी।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर हमने ऑपरेशन गंगा लॉन्च किया, जिसके अंतर्गत यूक्रेन-रूस के बीच चल रहे संघर्ष की स्थिति के दौरान चुनौतीपूर्ण निकासी अभियान चलाया गया। इसके लिए हमारा समुदाय चुनौतियों का सामना करते हुए यूक्रेन के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद था।

उन्होंने कहा कि इस अभियान की समीक्षा प्रधानमंत्री मोदी दैनिक आधार पर करते थे। विदेश मंत्रालय में हमने 24×7 आधार पर निकासी कार्यों की निगरानी की। हमें नागरिक उड्डयन मंत्रालय, रक्षा, एनडीआरएफ, वायुसेना, प्राइवेट एयरलाइंस सहित सभी संबंधित मंत्रालयों और संगठनों से उत्कृष्ट समर्थन मिला।

इसी बीच उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने कई मौकों पर रूस और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों से बात की। उन्होंने विशेष रूप से खारकीव और सुमी से भारतीयों की सुरक्षित निकासी का मुद्दा उठाया। प्रधानमंत्री मोदी ने रोमानिया, स्लोवाक गणराज्य, हंगरी और पोलैंड के राष्ट्रपतियों से अपने देशों में भारतीयों के प्रवेश की सुविधा के लिए समर्थन मांगने के लिए बात की।

विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन गंगा के तहत रोमानिया, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य और पोलैंड में 4 केंद्रीय मंत्रियों को विशेष दूत के रूप में प्रतिनियुक्त किया। इसमें रोमानिया से ज्योतिरादित्य सिंधिया, स्लोवाक गणराज्य के किरेन रिजिजू, हंगरी से हरदीप सिंह पुरी और पोलैंड से जनरल वीके सिंह शामिल थे।

90 उड़ानें की गईं संचालित

विदेश मंत्री ने बताया कि आधे से ज्यादा छात्र पूर्वी यूक्रेन के विश्वविद्यालयों में थे जो क्षेत्र रूस की सीमा से लगा है और अब तक संघर्ष का केंद्र रहा है। 35 राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के छात्रों को निकाला गया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन गंगा के तहत 90 उड़ानें संचालित की गई हैं, जिनमें से 76 नागरिक उड़ानें और 14 वायुसेना की उड़ानें थीं। निकासी उड़ानें रोमानिया, पोलैंड, हंगरी और स्लोवाकिया से भारत पहुंचीं।