अमेरिका बनाम चीन की ‘जंग’ का मैदान बना नेपाल, सरकार पर छाया संकट

भारत का पड़ोसी देश नेपाल इन दिनों अमेरिका बनाम चीन की जंग में पिसता हुआ नजर आ रहा है। लेकिन एक कॉमन बात ये है कि इस बार भी नेपाल के राजनीतिक बवाल के केंद्र में चीन ही है। नेपाल में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल सीपीएन माओवादी के नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड के सरकार से अलग होने की चेतावनी के बाद अब प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की शरण में पहुंच गए हैं। ये पूरा विवाद अमेरिका के मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) को लागू करने पर हो रहा है। जिसका चीन समर्थक गुट विरोध कर रहा है।

प्रचंड के विरोध के बाद देउबा सरकार ने एमसीसी को संसद में पेश करने के फैसले का टाल दिया है। मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) समझौता 16 फरवरी को ही नेपाल की संसद के पटल पर रखा जाना था, लेकिन 50 करोड़ डॉलर के अनुदान के विषय पर हो रहे विरोध के मद्देनजर इसे टाल दिया गया। इस पर नेपाल में सत्तारूढ़ नेपाली कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि देउबा अब विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। क्योंकि वो एमसीसी समझौते को संसद में पेश करने को लेकर बंधा हुआ है।

पिछले हफ्ते अमेरिका ने नेपाल को चेतावनी दी थी कि यदि उसने 28 फरवरी तक एमसीसी के तहत अमेरिका के प्रस्तावित अनुदान सहायता का अनुमोदन नहीं किया तो वाशिंगटन काठमांडू के साथ अपने संबंधों की समीक्षा करेगा और इस नाकामी को चीन के हित से जोड़ कर देखेगा। इस बीच, अमेरिका से सहायता प्राप्त 50 करोड़ डॉलर की परियोजना के पक्ष और विपक्ष में प्रदर्शन हुए।

चीन काठमांडू में जारी राजनीतिक बहस में कूद गया है। चीन ने कहा कि वह ‘‘जबरदस्ती की कूटनीति’’ और संप्रभुता की कीमत पर सहायता के खिलाफ है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि बीजिंग नेपाल को अंतरराष्ट्रीय सहायता देखकर ‘‘प्रसन्न’’ है, लेकिन यह सहायता बिना किसी राजनीतिक बंधन के होनी चाहिए। वांग ने कहा, इस तरह का सहयोग नेपाली लोगों की इच्छा के पूर्ण सम्मान पर आधारित होना चाहिए और इसमें कोई राजनीतिक बंधन नहीं होना चाहिए।

मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) समझौता नेपाल की प्रतिनिधि सभा के समक्ष विचारार्थ है। नेपाल और अमेरिका ने 2017 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किया था। इसका उद्देश्य विद्युत पारेषण लाइन और राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे नेपाल के बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है। एमसीसी के तहत अमेरिकी सरकार नेपाल को कई प्रोजेक्ट के लिए अनुदान देगी। अनुदान का उपयोग मुख्य रूप से नेपाल की बिजली परियोजनाओं में होगा। इससे नेपाल में ट्रांसमिशन लाइन को मजबूत किया जाएगा। इससे नेपाल आसानी से भारत को पनबिजली का निर्यात कर पाएगा। अमेरिका इसके जरिये नेपाल में सड़क नेटवर्क भी सुधार करेगा।