सेना प्रमुख नरवणे के बयान पर पाक-चीन को लगी मिर्ची, एक ने दुर्भावनापूर्ण बताया तो दूसरे ने दी ऐसी टिप्पणी से परहेज की नसीहत


पाकिस्तान और चीन की चालबाजियों पर भारतीय सेना के प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने बड़ा बयान दिया। एक तरफ आर्मी चीफ ने पीएलए के एलएसी पर हरकतों को उजागर किया तो वहीं पाकिस्तान द्वारा एलओसी पर आतंकवादियों के लिए लांच पैड बनाए जाने की पोल भी खोल दी। जिसके बाद से दोनों देशों को मिर्ची लग गई है। चीन ने जहां आर्मी चीफ के बयान पर आपत्ति जताई वहीं पाकिस्तान ने भी आरोपों का खंडन किया है। बीजिंग ने गुरुवार को भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे के उस बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया था कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपने निर्माण के साथ खतरे का स्तर अभी तक कम नहीं हुआ है। इस्लामाबाद ने भी भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार आतंकवादी शिविरों के अस्तित्व के बारे में भारतीय सेना प्रमुख की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त की।

भारतीय सेना प्रमुख ने कहा था कि पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा विवाद पर उन्होंने कहा कि आंशिक तौर पर भले ही सैनिक पीछे हटे हैं, लेकिन खतरा किसी भी तरह से कम नहीं हुआ है। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने बीजिंग में कहा कि वर्तमान में चीन और भारत सीमा पर स्थिति को कम करने के लिए राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से बातचीत और संचार में हैं । जब एक पत्रकार ने भारतीय सेना प्रमुख द्वारा दिए गए बयान पर चीनी सरकार की प्रतिक्रिया मांगी तो उन्होंने कहा हमें उम्मीद है कि भारतीय पक्ष के कुछ व्यक्ति असंवैधानिक टिप्पणी करने से परहेज करेंगे।

सेना प्रमुख नरवणे ने एलओसी के खतरे को रेखांकित करते हुए कहा था कि आतंकवादियों के लिए लांच पैड बनाये गय हैं। आये दिन सीमा पार से घुसपैठ की कोशिश हो रही है। जिसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता असीम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि भारतीय जनरल के निराधार आरोपों के बारे में कुछ भी नया नहीं है, क्योंकि ये भारत में भाजपा-आरएसएस द्वारा किए जा रहे दुर्भावनापूर्ण पाकिस्तान विरोधी प्रचार का एक हिस्सा हैं। “भारत सरकार ‘अखंड भारत’ की भ्रामक धारणा में निहित अपने जुझारू और विस्तारवादी एजेंडे से प्रेरित है, जो क्षेत्रीय शांति के लिए एक गंभीर खतरा है।