व्लादिमीर पुतिन ने वार्ता के लिए आर्मेनिया, अजरबैजान के नेताओं की मेजबानी की

मॉस्को। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नागोर्नो-कराबाख के अलगाववादी क्षेत्र में लड़ाई समाप्त करने वाले मॉस्को की मध्यस्थता वाले शांति समझौते की पहली वर्षगांठ के अवसर पर बातचीत के लिए क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों आर्मेनिया और अजरबैजान के नेताओं की मेजबानी की। दक्षिणी शहर सोची में, पुतिन ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इसके बाद रूसी राष्ट्रपति ने अलीयेव और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान से एक साथ मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वह पशिनयान के साथ एक अलग द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

बैठक की शुरुआत करते हुए, पुतिन ने कहा कि पिछले एक साल में बहुत कुछ किया गया है, लेकिन ‘‘सभी मुद्दों का समाधान अभी तक नहीं हुआ है।’’ उन्होंने दोनों देशों के बीच सीमा पर बार-बार होने वाली झड़पों की ओर इशारा किया, जिसके परिणामस्वरूप कई लोग हताहत हुए हैं। पुतिन ने कहा, ‘‘एक वर्ष के संघर्ष विराम का लक्ष्य, ‘‘क्षेत्र के पुनरुद्धार के लिए परिस्थितियों का निर्माण करना है, ताकि लोग वहां सुरक्षित महसूस कर सकें और सामान्य आर्थिक गतिविधियों को करने में सक्षम हो सकें … अर्थव्यवस्था का विकास हो सकें।’’ आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-कराबाख पर दशकों पुराना विवाद है।

अजरबैजान की सेना ने 2020 में 44 दिनों की भयंकर लड़ाई में आर्मेनियाई सेना को हराया था, जो रूस की मध्यस्थता के बीच शांति समझौते के साथ समाप्त हुआ। शांति समझौते की निगरानी के लिए रूस ने कम से कम पांच साल के लिए लगभग 2,000 शांति सैनिकों को तैनात किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि दक्षिणी शहर सोची में पुतिन ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलियेव के साथ द्विपक्षीय बैठक की। पुतिन ने शुक्रवार को कहा कि आर्मेनिया, अजरबैजान और रूस ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हुए एक साल में ‘‘बहुत कुछ हासिल किया।’’

उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर कोई लड़ाई नहीं हुई है, लगभग 53,000 शरणार्थी अपने घरों को लौट गए हैं और रूसी शांति रक्षक नागोर्नो-कराबाख निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। अपने उद्घाटन भाषण में, अलीयेव और पशिनयान ने कहा कि वे सीमा के परिसीमन और सीमांकन पर काम शुरू करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, पशिनयान ने कहा कि सीमा पर और नागोर्नो-कराबाख में स्थिति ‘‘उतनी स्थिर नहीं है जितनी होनी चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि ‘‘दोनों पक्षों के दर्जनों लोग’’ पिछले एक साल में संघर्ष में मारे गए। उन्होंने सीमा पर स्थिति को ‘‘संकटपूर्ण’’ बताया। आर्मेनिया के प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध के कैदियों, बंधकों और बंदी बनाए गए अन्य व्यक्तियों का मुद्दा नहीं सुलझा है।