नींद की कमी बढ़ा सकती है गंभीर बीमारियों का खतरा

नई दिल्ली। हममें से ज्यादातर लोग रात में निर्धारित समय (जल्दी) पर सो नहीं पाते और रातभर करवट बदलते रहते हैं और सुबह उठकर फिर से काम में लग जाते हैं। इससे पूरे दिन सुस्ती और आलस महसूस होता रहता है। जाहिर सी बात है इसका असर हमारे परफाम्रेस पर भी पड़ता है। कभी-कभी नींद ना आना आम है, लेकिन लगातार आपके साथ यह स्थिति कई हफ्ते तक बनी रहती है, तो आपको यह जरूर सोचना होगा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है, इसके कारणों पर विचार कर इन्हें दूर करने के प्रयास जरूर करें।
नींद क्यों नहीं आती : कमरे का तापमान सामान्य रखें। अगर तापमान गर्म होगा, तो यह आपके बाडी टेम्प्रेचर को बढ़ाएगा, जिससे आपके लिए सोना कठिन हो जाएगा। इसी तरह ठंडे कमरे से भी असुविधा हो सकती है। खाना समय पर ही खाएं। देर रात को खाना या स्नैक्स खाने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है और नींद ना आने की समस्या होती है।
दनींद के दौरान कमरे में बहुत ज्यादा तेज रोशनी के कारण मस्तिष्क के लिए गहरी अवस्था में आराम करना मुश्किल हो जाता है। कैफीन के अधिक सेवन से नींद पूरी तरह से डिस्टर्ब हो जाती है। नींद की बीमारी स्लीप डिसआर्डर जैसे रेस्टलैस लैग्स सिंड्रोम, जेट लैग और इंसोमनिया आपको सोने से रोक सकती हैं।
उम्र के हिसाब से नींद : नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार 26 से 64 वर्ष के लोगों को 7 से 9 घंटे, 64 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को 7 से 8 घंटे और टीनएजर्स को 9 से 10 घंटे रोजाना नींद लेना जरूरी है। हालांकि नींद की जरूरतें व्यक्ति के जेंडर पर भी निर्भर करती हैं। रिसर्च में पाया गया है कि महिलाओं को पुरु षों की अपेक्षा अधिक नींद की आवश्यकता है।
कम नींद लेने के खतरे : दकम नींद लेने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है जिससे इंफेक्शन अधिक होते हैं और हम जल्दी-जल्दी बीमार हो जाते हैं। कम नींद के कारण में शरीर में प्र्याप्त पोषण की कमी होने लगती है और आप विटामिन डी, बी और आयरन की डेफिशियेंसी के शिकार हो जाते हैं। कम नींद के कारण व्यक्ति का वजन या तो तेजी से बढ़ता है या तेजी से कम होने लगता है। एक अमेरिकी शोध के अनुसार छह घंटे से कम की नींद मोटापे का कारण बन सकती है। नींद पूरी न हो, तो कुछ समय बाद व्यक्ति के स्वभाव में चिड़चिड़ापन आने लगता है। इससे व्यवहार असामान्य हो सकता है। कम नींद का असर याददाश्त पर भी पड़ता है। कम नींद के कारण व्यक्ति धीरे-धीरे अवसाद में चला जाता है और इससे हृदयाघात होने का खतरा भी कई गुणा बढ़ जाता है। कम नींद के कारण डायबिटीज भी हो सकता है और यह उच्च रक्तचाप का कारण बन सकती है।