हर 8 मिनट में एक भारतीय महिला हो रही सर्वाइकल कैंसर से ग्रसित

नई दिल्ली। वैिक महामारी कोविड काल में स्त्री एवं प्रसूति संबंधी विकृतियों में तेजी दर्ज की गई है। वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सफदरजंग अस्पताल में स्त्री व प्रसूति रोग विभाग की प्रोफेसर डा. अर्चना मिश्रा के अनुसार भारतीय महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौत का सबसे आम कारण सर्वाइकल कैंसर है। भारत में हर 8 मिनट में एक महिला सर्वाइकल कैंसर का शिकार हो रही है, लेकिन ये उन कैंसरों में से एक है जिसमें सौ प्रतिशत मरीज को बचाया जा सकता है।
मामले बढ़ने की वजह, जागरूकता का अभाव : डा. अर्चना मिश्रा ने कहा कि भारत में सर्वाइकल कैंसर जागरूकता का अभाव है। 9 से 15 साल की बालिका के एचपीवी वैक्सीन लगाई जाए, उस बालिका के 80 से 90 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है। सर्वाइकल कैंसर की अगर जांच की जाए तो करीब 10 साल पहले ही डॉक्टर्स ये बता सकते हैं कि मरीज को आगे जाकर इस तरह का कैंसर होने की संभावना है या नहीं। प्रिवेंशन ऑफ सर्वाइकल कैंसर थीम पर फोकस करते हुए एक वेबिनार में डा. मिश्रा ने कहा कि बढ़ते मामलों में कमी लाने के लिए जरूरी है महिला चिकित्सकों के जरिए ये जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाए। ताकि एचपीवी वैक्सीन, एचपीवी जांच, पैप स्मियर यानी पानी की जांच कराने के लिए 30 से 65 वर्ष की सभी महिलाओं को जांच कराने के लिए जागरूक किया जाए। माता-पिता को अपनी 9-13 वर्ष की किशोरी कन्याओं के एचपीवी वैक्सीनेशन के लिए आगे आना चाहिए। पिछले वर्ष कोरोना की वजह से सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग की चाल में कमी दर्ज की गई है। पिछले साल देश में सर्वाइकल कैंसर के 1.2 लाख मामले सामने आए और करीब 77 हजार महिलाओं की अकाल मृत्यु हुई। डा. मिश्रा ने कहा कि दरअसल इस कैंसर का कारण है ह्यूमन पेपीलोमा वायरस नामक जीवाणु। जिसकी पहचान यदि प्रारंभ में ही कर ली जाए तो मृत्युदर, और बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।

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