स्कूल में बालिका से दुष्कर्म की घटना छुपाने पर प्रबंधक व प्रिंसिपल को कोर्ट ने दी सजा


गोरखपुर। गोरखपुर जिले के पब्लिक स्कूल में बालिका से दुष्कर्म की घटना छिपाने पर कोर्ट ने आरोपी प्रबंधक व प्रिंसिपल को कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न भरने पर एक-एक महीने की कारावास की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।

गोरखपुर के इस चर्चित मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम नवल किशोर सिंह के फैसले को नजीर माना जा रहा है। कानून के जानकारों का कहना है कि बच्चों से अपराध के मामलों की जानकारी खुद पुलिस को देनी होगी। ऐसा नहीं हुआ तो सजा भुगतनी पड़ सकती है। कोर्ट का यह फैसला गोरखपुर के लिहाज से ऐतिहासिक है। पुलिस के मुताबिक प्रबंधक व प्रिंसिपल ने दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध को छुपाया। लैंगिक अपराध और बालकों के संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत अपराध को छुपाना दंडनीय अपराध है। इसी आधार पर प्रबंधक और प्रिंसिपल को कारावास की सजा सुनाई गई।

वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी संजय कुमार सिंह और विशेष लोक अभियोजक राघवेंद्र त्रिपाठी के अनुसार घटना सात नवंबर 2014 की है। पीड़िता सुबह नौ बजे स्कूल गई थी। दिन में वह घर आई तो मां ने उसके कपड़ों में खून लगा देखा। हतप्रभ मां ने पूछताछ की तो पता चला कि बच्ची से दुष्कर्म हुआ है। बच्ची ने स्कूल के बाथरूम में घटना होने की जानकारी दी। बच्ची ने घटना की जानकारी एक शिक्षक को भी दी थी। शिक्षक ने आरोपी लड़के को मारपीटकर बाथरूम में बंद कर दिया था।
वाकया सामने आने पर जब बच्ची के परिजन स्कूल गए तो प्रिंसिपल ने सुनवाई नहीं की और दबाव बनाकर मामले में सुलह कराना चाहा।

इसके बाद परिजन पुलिस के पास गए। सात नवंबर को देर रात राजघाट पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ दुष्कर्म (376 ग) व पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस की विवेचना के दौरान स्कूल प्रबंधक व प्रिंसिपल ने सहयोग नहीं किया। स्कूल प्रबंधन ने घटना की जानकारी पुलिस और बच्ची के परिजनों तक को नहीं दी। उन्हाेंने आरोपी का नाम भी नहीं बताया। लिहाजा, पुलिस ने प्रबंधक व प्रिंसिपल के खिलाफ लैंगिक अपराध की सूचना न देने के आरोप में चार्जशीट दाखिल की।