प्रोस्टेट बढ़ने से होती हैं पेशाब संबंधी समस्याएं

नई दिल्ली। उम्र बढ़ने के साथ हार्मोनल परिवर्तनों के कारण बीपीएच या बेनाईन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया जैसी बीमारियां हो जाती हैं। यह बढ़ी हुई प्रोस्टेट के चिकित्सीय नाम हैं। बीपीएच सौम्य होता है। इसका मतलब है कि यह कैंसर नहीं है। यह कैंसर का कारण भी नहीं है। हालांकि, बीपीएच और कैंसर एक साथ हो सकते हैं।
बीपीएच के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं और यह बढ़ने के साथ लक्षण अलग-अलग भी हो सकते हैं। बढ़ी हुई प्रोस्टेट से अनेक परेशानियां और समस्याएं होती हैं। इससे पेशाब संबंधी समस्याएं ज्यादा होती हैं।
प्रोस्टेट बढ़ने के कारण
शोध से पता चलता है कि कुछ चीजें, जैसे मोटापा बीपीएच के बढ़ने में मददगार हो सकती हैं। प्रोस्टेट क्लीनिक गुरुग्राम के यूरोलोजिस्ट डा. राजीव गोयल ने बताया कि पुरुषों में 50-60 साल की उम्र में तकरीबन 50 फीसद में यह बीमारी होती है।
80 की उम्र पहुंचते पहुंचने यह 90 फीसद लोगों में पाई जाती है। प्रोस्टेट उम्र के साथ वृद्धि के दो मुख्य चरणों से गुजरता है। पहला चरण यौवनावस्था की शुरु आत में होता है, जब प्रोस्टेट का आकार बढ़कर दोगुना हो जाता है। वृद्धि का दूसरा चरण लगभग 25 साल की उम्र से शुरू होता है और आजीवन चलता रहता है। बीपीएच अक्सर वृद्धि के दूसरे चरण में होता है।
क्या होती है परेशानी
जब प्रोस्टेट बढ़ जाती है, तो वह ब्लैडर पर दबाव डाल सकती है या उसे रोधित कर सकती है, जिससे लोअर यूरिनरी ट्रैक्ट सिंपटम्स (लुट्स) यानि निचली मूत्रनली की समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें बार-बार पेशाब आना, पेशाब करने के फौरन बाद भी ब्लैडर भरा हुआ महसूस होना, पेशाब बहुत धीरे-धीरे आना, पेशाब करते हुए बार-बार रु कना, पेशाब करने में मुश्किल होना, दबाव पड़ना आदि शामिल हैं।
क्या है समाधान
बीपीएच के लिए एक्टिव सर्वियलेंस (सावधानीपूर्वक निगरानी) करने की जरूरत होती है। डा. योगल के मुताबिक कुछ मामलों में दवाई से काम चल जाता है और कभी-कभी मिनिमली इन्वेसिव प्रक्रिया की जरूरत होती है। कभी-कभी मिश्रित इलाज श्रेष्ठ रहता है। जीवनशैली का प्रबंधन करने की सरल विधियों से भी लक्षणों का इलाज किया जा सकता है
दचुस्त रहें, शिथिल जीवन से ब्लैडर पूरी तरह से खाली न हो पाने की समस्या हो सकती है।
दबाथरूम जाने पर अपना ब्लैडर पूरी तरह से खाली करने की कोशिश करें।
दहर रोज एक दिनचर्या के अनुरूप पेशाब करने की कोशिश करें, फिर चाहे आपकी पेशाब करने की इच्छा हो रही हो या नहीं।
दरात में 8 बजे के बाद कोई भी तरल पदार्थ न पिएं, ताकि आपको रात में पेशाब न आए।
दअल्कोहल पीना सीमित कर दें। ज्यादा गंभीर मामलों में प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रु क सकती है, जिससे और ज्यादा गंभीर समस्याएं, जैसे किडनी फेल हो सकती है। इसका इलाज फौरन करना पड़ता है। इसलिए, यदि आपको कोई भी लक्षण दिखता हो, तो उसका निदान कराएं और जानें कि उसके इलाज के लिए आप क्या कर सकते हैं।

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