चांदनी चौक के कायाकल्प का किया स्वागत

नयी दिल्ल । पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक में ऐतिहासिक खंड के कायाकल्प का इतिहासकारों और अन्य विशेषज्ञों ने स्वागत किया है। उन्होंने सहमति व्यक्त की कि वास्तुशिल्प के लिहाज से यह संवेदनशील पुनर्विकास परियोजना दिल्ली की विरासत के लिए एक अच्छी शुरुआत है।
शाहजहांनाबाद पुनर्विकास निगम (एसआरडीसी) द्वारा समग्र पहल के तहत लाल किला क्षेत्र से फतेहपुरी मस्जिद तक चांदनी चौक के लगभग 1.4 किलोमीटर की सड़क को सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक गैर-मोटर वाहन चालित क्षेत्र बनाया गया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को पुनर्निर्मित खंड का लोकार्पण किया और घोषणा की कि आधी रात तक स्ट्रीट फूड स्टॉल को संचालित करने की अनुमति देकर पूरे क्षेत्र को एक पर्यटन केंद्र में बदल दिया जाएगा।

इस परियोजना की, विरासत विशेषज्ञों और इसमें रूचि रखने वालों ने तारीफ की है। शाहजहांनाबाद पर विस्तार से लिखने वाली इतिहासकार और लेखिका राना सफवी ने दिल्ली में विरासत के मामले में परियोजना को ”बहुत अच्छी शुरुआत” कहा।

उन्होंने कहा, ”विरासत को ध्यान में रखकर पुनर्विकास परियोजना को तैयार करते सरकारी अधिकारियों और विभिन्न एजेंसियों को देखना बहुत ही स्वागत योग्य है। विकास के नाम पर विरासत को अक्सर नुकसान होता है और चांदनी चौक परियोजना निश्चित रूप से उस आशावाद के स्तर को बढ़ाती है जिसे कोई विरासत भवनों के लिए महसूस करता है।”

‘शाहजहानाबाद : द लिविंग सिटी ऑफ ओल्ड दिल्ली’ की लेखिका ने प्रसन्नता व्यक्त की कि आगंतुकों को अब पुरानी गलियों में पैदल चलकर इसे देखने का मौका मिलेगा जो पहले बिजली के तार और भीड़-भाड़ के कारण संभव नहीं हो पाता था।

इतिहासकार और लेखिका स्वप्ना लिडल ने भी इस परियोजना का ”बहुत अच्छा कदम” के रूप में स्वागत किया और आशा व्यक्त की कि समूचा शाहजहांनाबाद आकर्षण का केंद्र होगा। उन्होंने कहा, ”यह एक अच्छी शुरुआत है लेकिन अंत में इसे समग्रता में देखना होगा। जैसा कि पूरे शाहजहांनाबाद के कायाकल्प में सिर्फ टुकड़ों में नहीं बल्कि समग्रता को ध्यान में रखा जाना चाहिए। लेकिन, यह विरासत-संवेदनशील पुनर्विकास परियोजना निश्चित रूप से विरासत के लिए अच्छी खबर है।”

दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री और एसआरडीसी के अध्यक्ष सत्येंद्र जैन ने रविवार को संवाददाताओं से कहा था कि इस मार्ग पर ‘विरासत की तरह दिखने वाला’ हरित वाहन चलाने की योजना है। यह भी सुझाव दिए गए हैं कि दुकानों के बोर्ड एक समान हो जैसा कि विदेशों में इस तरह की परियोजनाओं में होता है।

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