जासूसी मामला : पेगासस का दुरुपयोग तो नहीं

नई दिल्ली। पेगासस जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह केंद्र सरकार से यह जानना चाहता है कि नागरिकों की कथित जासूसी के लिए अवैध तरीके से पेगासस सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया या नहीं। केंद्र सरकार ने इस संबंध में अदालत में हलफनामा दायर करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।
चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस सूर्यकांत और हिमा कोहली की बेंच के समक्ष केंद्र सरकार ने कहा कि कथित पेगासस जासूसी मामले में स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर वह विस्तृत हलफनामा दाखिल नहीं करना चाहती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह केवल यह जानना चाहती है कि क्या केंद्र ने नागरिकों की कथित जासूसी के लिए अवैध तरीके से पेगासस सॉफ्टवेयर का उपयोग किया या नहीं। पत्रकारों एवं अन्य द्वारा निजता हनन की चिंताओं के बीच केन्द्र के इस रुख को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर वह अंतरिम आदेश देगा। साथ ही दोहराया कि अदालत राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी मामले की जानकारी प्राप्त करने की इच्छुक नहीं है। विस्तृत हलफनामे के जरिए केंद्र का इस बारे में स्पष्ट रुख सामने आने का जिक्र करते हुए बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह अपनी दलीलों में अदालत के सामने राष्ट्रीय सुरक्षा की बात लगातार दोहरा रहे हैं।
अदालत ने कहा कि कानून के तहत स्थापित एक प्रक्रिया है, जो फोन सुनने की भी अनुमति देती है। आपके रुख को समझने के लिए हमें आपका हलफनामा चाहिए था। हम इससे आगे कुछ और नहीं कहना चाहते। अदालत ने यह भी कहा कि अगर सरकार किसी जासूसी सॉफ्वेयर का उपयोग करती है तो यह कानून के तहत स्थापित प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए। अदालत ने मेहता से कहा कि हम आदेश सुरक्षित रख रहे हैं। अंतरिम आदेश दिया जाएगा जिसमें दो से तीन दिन का वक्त लगेगा। यदि आप हलफनामा दायर करने के बारे में पुन: विचार करते हैं तो मामले का उल्लेख हमारे समक्ष कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने मेहता से कहा कि हम केवल एक सीमित हलफनामे की उम्मीद कर रहे थे, क्योंकि हमारे सामने याचिकाकर्ता हैं जिनका कहना है कि ए या बी एजेंसी द्वारा उनके निजता के अधिकार का उल्लंघन किया गया है। आपको ये बताना होगा कि ऐसा किया गया या नहीं। राष्ट्रीय सुरक्षा वर्तमान कार्यवाही का हिस्सा नहीं है। अदालत ने कहा कि हम फिर दोहराते हैं कि हम भी नहीं चाहते कि सुरक्षा व रक्षा संबंधी मुद्दे हमारे समक्ष रखे जाएं। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से करीब घंटे भर चली सुनवाई के दौरान केंद्र ने अदालत से कहा कि वह विस्तृत हलफनामा दायर नहीं करना चाहता।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि सरकार ने किसी विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है या नहीं, यह सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं है। इससे संबंधित जानकारी को हलफनामे का हिस्सा बनाना राष्ट्रहित में नहीं होगा। विशेषज्ञों की समिति की रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और यही वजह है कि उसने अपनी ओर से कहा कि आरोपों की जांच के लिए वह क्षेत्र के विशेषज्ञों की समिति का गठन करेगा।

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