बाल-अपराध को रोकने के लिए फिल्म छोटे उस्ताद् के साथ आया प्रयास एनजीओ

प्रयास एनजीओ के संस्थापक पूर्व आई.पी.एस. अधिकारी श्री आमोद कंठ ने कहा कि बाल-अपराध के कई कारण हैं, हमें समाज़ को जागरूक करने के लिए छोटे-उस्ताद् की तरह फिल्म और डॉक्यूमेंट्री बनाते रहना चाहिए

नयी दिल्ली (संचार टाइम्स) । प्रयास एन.जी.ओ. नाबालिकों को एक बेहतर जीवन जीने और उनकी शिक्षा और परवरिष पर हर संभव कार्य कर रहा है। इनके सर्वांगिक विकास के लिए एक परिवार की पूरी जिम्मेदारी निभाई जाती है। यहां से पले-बढ़े और शिक्षित युवक-युवतियां विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी करके समाज़ में एक अच्छा जीवन-जी रहे हैं। कुछ बच्चे विदेशों में नौकरी कर रहे हैं और पारिवारिक जीवन जी रहे हैं।
प्रयास बाल-अपराध में लिप्त बच्चों और उनके माता-पिता तथा समाज़ को जागरूक करने के लिए फिल्म छोटे उस्ताद्-प्रिकांसन इज़ बेटर देन क्योर के साथ जुड़ गया। फिल्म में दिखाया गया है कि कोई भी बच्चा जन्म से अपराधी नहीं होता। जब बच्चों को सही परवरिश और शिक्षा नहीं मिलती तो अपराधी प्रवृति के लोग आसानी से इन बच्चों से कोई क्राइम करवा लेते हैं। ये बच्चे तो किसी भी अपराध के हथियार बनकर कार्य करते हैं। असली गुनाहगार तो वे लोग हैं जो उनसे क्राइम करवाते हैं। इसीलिए इन बच्चों को सही दिशा-निर्देश और माहौल की जरूरत है।
समाज़ में हो रही बाल-अपराधों की घटनाओं को संग्रहित करके फिल्म छोटे उस्ताद् का रूप दिया गया है। फिल्म मेकर्स ने बाल-अपराधों के असली गुनाहगार को पकड़ने की कोशिश किया है। उन पर सवाल उठाये हैं।
इस मौके पर प्रयास एन.जी.ओ. के संस्थापक पूर्व आई.पी.एस. अधिकारी श्री आमोद कंठ ने कहा कि बाल-अपराध के कई कारण हैं, हमंे समाज़ को जागरूक करने के लिए छोटे-उस्ताद् की तरह फिल्म और डॉक्यूमेंट्री बनाते रहना चाहिए। उन्होंने भविष्य में नाबालिकों से संबंधिक समस्या ओं उज़ागर करने के लिए फिल्म बनाने की बात कही। कार्यक्रम में उपस्थित श्री ज्योति कलश आई.ए.एस., जिन्होंने ने फिल्म महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उन्होंने बाल-सुधार गृहों को सुधारने की बात कही और बताया कि फिल्म किस तरह से बाल-सुधार गृह का असली चेहरा दिखाया गया है। फिल्म के लेखक और निर्देशक संजय भारती ने कहा कि आम लोगों में बाल-अपराधों के प्रति लोगों में जागरूकता लाने की जरूरत है। बाल अपराध के कई कारण है और हमें इनके सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए फिल्म बनाने की जरूरत है, जिससे लोगों में अपने बच्चों के प्रति जागरूक आये।
अंत में श्री अमोद कंठ ने कहा कि प्रयास एन.जी.ओ. नाबालिकों के उत्थान के लिए जैसे जमीनी-स्तर पर कार्य करता रहा है वैसे फिल्म और दूसरे संचार माध्यमों से नाबालिकों की बेहतरी के लिए समाज़ को जागरूक भी करता रहेगा है। लोगांे को फिल्म छोटे उस्ताद् देखना चाहिए। यह फिल्म ओ.टी.टी. चैनल हंगामा, एम.एक्स प्लेयर, एमैजोन, वी.आई और विभिन्न चैनलों पर प्रदर्शित की गई है।