पदक जीतने के बाद भगवान के दर पर माथा टेक रहे ओलंपियन रवि दहिया

नई दिल्ली। टोक्यो ओलिंपक में पदक जीतने के बाद कई खिलाड़ी भगवान के दर पर माथा टेक रहे हैं और पदक जीतने पर आभार जताने के साथ ही अगले ओलिंपिक में गोल्ड मेडल की कामना कर रहे हैं। सोनीपत के गांव नाहरी के ओलंपियन रवि दहिया ने सिल्वर मेडल जीतने पर दो दिन पहले लखनऊ से लौटते समय हरिद्वार से पहले स्थित मंदिर में जलाभिषेक किया था। वहीं, रवि ने सोमवार को जम्मू में माता वैष्णो देवी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया। इससे पहले रविवार को रवि ने अपने गांव के बाबा शंभूनाथ मंदिर में पूजा की थी। वहीं, ओलिंपिक में सिल्वर मेडल जीतकर पीवी सिंधू ने भी कई मंदिरों में पहुंचकर भगवान का आशीर्वाद लिया था।

रविवार को रक्षाबंधन के दिन दोपहर में रवि अपने छोटे भाई पंकज व साथियों के साथ अपने गांव नाहरी पहुंचे। वहां उन्होंने गांव के दादा शंभूनाथ के मंदिर में पूजा की। इसके बाद रवि भाई पंकज व साजन के साथ दिल्ली से हवाई जहाज के जरिये जम्मू पहुंचे। वहां उन्हें एक कार्यक्रम में भाग लेना था। इसके बाद वे सोमवार तड़के माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए निकल पड़े। रवि ने भाई पंकज और साथियों के साथ माता के दर्शन कर ओलिंपिक मेडल के लिए आभार जताया और अगले ओलिंपिक में गोल्ड मेडल की कामना की। पहलवान साजन ने बताया कि पूरे रास्ते रवि और अन्य साथी माता के जयकारे लगाते रहे। रास्ते में रवि के साथ फोटो खिंचवाने के लिए लोगों में होड़ सी लग गई। रवि और अन्य लोग मंगलवार तड़के दिल्ली लौट गए।

हरिद्वार में किया था रूद्राभिषेक

पहलवान साजन ने बताया कि लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी द्वारा सम्मानित करने बाद वे हरिद्वार से पहले स्थित शंभूनाथ के मंदिर पहुंचे और वहां भगवान शिव का जलाभिषेक किया। रवि ने ओलिंपिक से पहले भगवान भोलेनाथ से मन्नत मांगी थी वह टोक्यो से पदक लेकर लौटे। सिल्वर मेडल जीतने के बाद रवि रूद्राभिषेक किया और अगली बार गोल्ड जिताने की मन्नत मांगी।

पड़ोसी ग्रामीणों को नहीं मिल रहा सम्मानित करने का मौका

रवि के पिता राकेश दहिया ने बताया कि टोक्यो से लौटने के बाद से रवि व्यस्त हैं। कई राज्यों के सम्मान समारोह के लिए रोज जाना पड़ रहा है। आगामी एक सप्ताह तक रवि का व्यस्त शेड्यूल है। उनके पड़ोसी गांव हलालपुर, किढ़ौली और पानीपत के एक गांव के लोग रवि को सम्मानित करना चाहते हैं लेकिन उन्हें समय नहीं मिल रहा। सभी को थोड़ा रुकने को कहा गया है।