बाल अपराध पर बनी फिल्म छोटे उस्ताद (प्रिकोशन इज बेटर देन क्योर)

नई दिल्ली (संचार टाइम्स)। अपराध की कोई उम्र नहीं होती। आश्चर्य तब होता है जब किसी मर्डर-मिस्ट्री जैसे सीन अपराध को सुलझाते-सुलझाते पुलिस किसी नाबालिक तक पहुंचती है। आये दिन ऐसे कई अपराध होते हैं जिसे नाबालिक बडे ही आसानी से कर देते हैं। और उनके मनोदसा को समझने की कोशिश की जाये तो उनके द्वारा किये इन अपराधों की कोई बहुत बड़ी वजह नहीं होती, फिर भी वो कर देते हैं।
बल अपराधो की श्रेणी में किसी खास वर्ग के नाबालिक ही शामिल हैं ऐसा नहीं है। आमतौर पर झुग्गी-झोपड़ी और कम पढे लिखे परिवारों के बच्चों को अपराधी घोषित कर देते हैं। यह जानकर आश्चर्य होता है कि बडे घरों के रिहायशी इलाकों के नाबालिकों का अपराध बड़ा होता है और उनके अपराध का तरीका भी फिल्मों से प्रभावित और अनोखा होता है। यानी अपराध की दुनिया में किसी भी वर्ग या नाबालिक कब कदम रख दे ये उनके माता-पिता को भी पता नहीं चलता।
इसलिए अब वक्त आ गया है कि नाबालिकों से जुड़े अपराधों पर समाज के सभी वर्गांे में खुलकर चर्चा हो। फ्रेमवे प्रोड्क्शन के बैनर तले बनी फिल्म छोटे उस्ताद-प्रिकोशन इज बेटर देन क्योर को बडे ही सहजता और मनोरंजक ढंग से प्रेषित किया गया है। यह फिल्म अपने विषय वस्तु के लिए दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म में सेलेक्ट हुई है और बेस्ट स्टोरी का अवार्ड भी मिला।
इस फिल्म को आप हंगामा, मैक्स प्लेयर, अमेजॉन और विभिन्न ओटीटी चैनल पर देख सकते हैं।
इस फिल्म में दिल्ली और मुंबई के कालाकारों ने काम किया है। बाल कलाकार के रूप में अनुवंश शर्मा की मुख्य भूमिका है। कई अन्य बाल कलाकार दिल्ली से हैं। ज्योति कलश जो एक आईएएस अधिकारी हैं। भोपाल सिंह, संदीप सिंह, सोहित सोनी, शुभम, सागर शौर्य, निखिल आदि कलाकार शामिल हैं।
फिल्म के लेखक व निर्देशक संजय भारती हैं।