यूपी जनसंख्या नियंत्रण विधेयक: विहिप ने विधेयक के दूसरे भाग पर जताई आपत्ति

लखनऊ: विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण विधेयक के मसौदे में एक बच्चे के मानदंड पर आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार से इसे हटाने की मांग की है।

विहिप का मानना है कि एक बच्चे का मानदंड “हिंदू और मुस्लिम आबादी के अनुपात में असंतुलन” पैदा करेगा।

विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, “हम जनसंख्या के संबंध में कानून लाने के सरकार के कदम का स्वागत करते हैं, क्योंकि जनसंख्या पूरे देश में विस्फोट की तरह बढ़ रही है। जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के बारे में पूरे समाज में आम सहमति है।”

विहिप ने प्रस्तावित विधेयक के दूसरे भाग के खिलाफ चिंता जताई, जिसमें कहा गया है कि केवल एक बच्चे वाले जोड़े को कुछ ज्‍यादा लाभ मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने सुझाव दिया कि यह प्रावधान हिंदुओं और मुसलमानों के बीच जनसंख्या असंतुलन पैदा कर सकता है।

यूपी मसौदा जनसंख्या नियंत्रण विधेयक
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को विश्व जनसंख्या नियंत्रण के अवसर पर 2021-30 के लिए जनसंख्या नियंत्रण पर अपनी नई नीति का उद्घाटन किया था।

नीति का उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि को 2.1 प्रतिशत तक लाना है।

उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने शनिवार को जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से विधेयक का पहला मसौदा जारी किया था और 19 जुलाई तक जनता की राय मांगी थी। विधेयक में उन लोगों के लिए प्रोत्साहन की मांग की गई है जिनके दो या उससे कम बच्चे हैं। दो-बच्चे के मानदंड का पालन न करने की स्थिति में, निरुत्साहित किया जाएगा।

मसौदा विधेयक के अनुसार, दो बच्चों के मानदंड का उल्लंघन करने वालों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित कर दिया जाएगा और उनके राशन कार्ड चार इकाइयों तक सीमित होंगे। यदि वे लोक सेवक हैं तो उन्हें स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने, सरकारी नौकरियों या पदोन्नति के लिए आवेदन करने से भी रोक दिया जाएगा।