हाफिज सईद के घर के बाहर ब्लास्ट मामले में पुलिस की छापेमारी, हिरासत में लिए गए कई संदिग्ध

पाकिस्तान के लाहौर के जौहर टाउन इलाके में आतंकी सरगना हाफिज सईद के घर के पास हुए ब्लास्ट मामले में कई शहरों में छापेमारी के बाद पुलिस ने गुरुवार को कई संदिग्धों को हिरासत में लिया। बुधवार को हुए इस ब्लास्ट में 3 लोगों की मौत और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे। ब्लास्ट के दौरान हाफिज सईद के घर की रखवाली कर रहे कुछ पुलिस अधिकारी भी जख्मी हुए।

जियो टीवी की खबर के मुताबिक, पंजाब पुलिस के आतंकवाद रोधी विभाग (सीटीडी) ने बृहस्पतिवार को विस्फोट के सिलसिले में पंजाब के विभिन्न शहरों में छापेमारी की। सूत्रों के हवाले से खबर में बताया गया है कि सीटीडी ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है।

सूत्रों के मुताबिक, सीटीडी और खुफिया एजेंसियों ने घटनास्थल से सबूत जुटाए हैं। उन्होंने कहा कि बॉल बेयरिंग, लोहे के टुकड़े और वाहन के हिस्से मिले हैं। एजेंसियों ने इलाके में ‘जियो फेंसिंग’ शुरू कर दी है ताकि जांच में मदद मिल सके। ‘जियो फेंसिंग’ में जीपीएस के जरिए डिजिटल भौगोलिक सीमा बनाई जाती है और एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से उस क्षेत्र में किसी मोबाइल उपकरण के प्रवेश और बाहर निकलने का पता लगाया जाता है।

71- वर्षीय कट्टरपंथी मौलाना लाहौर की उच्च सुरक्षा वाली कोट लखपत जेल में आतंकवाद के वित्तपोषण के जुर्म में सजा काट रहा है। विस्फोट से अफवाह फैल गई कि सईद घर में मौजूद था। इस बीच, आतंकवादी घटना की निंदा करते हुए, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार की “त्रुटिपूर्ण अफगान नीति” के कारण ऐसे हमलों में बढ़ोतरी हो सकती है।

एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक, बुधवार को इस्लामाबाद में संसद भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए बिलावल ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बढ़ सकती हैं क्योंकि अफगान शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान की नीति “सही नहीं है।” उन्होंने कहा कि सीमा पार भी कुछ आतंकी संगठन सक्रिय हैं।

सईद संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी है। अमेरिका ने उस पर एक करोड़ डॉलर का इनाम रखा है। वह आतंकवाद के वित्तपोषण के पांच मामलों में सजा काट रहा है। सईद के नेतृत्व वाला जमात-उद-दावा आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन है जो 2008 के मुंबई हमले के लिए जिम्मेदार है। इस हमले में छह अमेरिकी नागरिकों समेत 166 लोगों की जान चली गई थी।