पीएम मोदी ने ब्लॉग में समझाया, भारत ने कैसे किया कोरोना की चुनौतियों का सामना, सुधारों पर दिया जोर

नई दिल्ली। कोरोना संकट की चुनौती से पूरी दुनिया निपट रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार और राज्य सरकारें बड़ी आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कोरोना महामारी और उसके बाद लगे लॉकडाउन के पिछले करीब दो साल में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने किस तरह इस चुनौती का सामना किया, इस मामले पर पीएम नरेंद्र मोदी ने एक ब्लॉग लिखा है। पीएम मोदी ने ब्लॉग के जरिए समझाया कि किस तरह भारत ने केंद्र और राज्य की भागीदारी के दम पर कोरोना संकट के दौरान चुनौतियों का सामना किया। आर्थिक सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदमों के लिए सुझाव दिए हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि जब दुनियाभर में वित्तीय संकट था, तब भारतीय राज्य 2020-21 में ज्यादा उधार लेने में सफल रहे हैं। आपको यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि 2020-21 में राज्य 1.06 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त उधार लेने में सक्षम रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों में भागीदारी के रवैये की वजह से ही संसाधनों की उपलब्धता में यह बढ़त संभव हुई।

केंद्र-राज्य भागीदारी की भावना में विश्वास

पीएम मोदी ने मंगलवार को “प्रोत्साहन और सुधार में विश्वास” नामक एक ब्लॉग पोस्ट लिखा है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी में नीति निर्माण के मामले में दुनिया भर की सरकारों के लिए चुनौतियों का एक नया संग्रह लेकर आई है। भारत इसमं कोई अपवाद नहीं है। ऐसे समय में स्थिरता सुनिश्चित करते हुए जन कल्याण के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक साबित हो रहा है। कोरोना महामारी के लिए देश की आर्थिक प्रतिक्रिया तैयार करते समय केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हमारे समाधान का ‘सभी के लिए एक आकार उपयुक्त होना’ मॉडल का पालन न करें।

पीएम मोदी ने कहा कि एक संघीय देश के लिए राज्य सरकारों द्वारा सुधारों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत साधन खोजना वास्तव में चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हमें अपनी संघीय राजनीति की मजबूती में विश्वास है और हम केंद्र-राज्य भागीदारी की भावना से आगे बढ़ रहे हैं।

आत्मनिर्भर भारत पैकेज में केंद्र सरकार ने किया था सहयोग

उन्होंने कहा कि मई 2020 में आत्मनिर्भर भारत पैकेज के हिस्से के रूप में भारत सरकार ने घोषणा की थी कि राज्य सरकारों को 2020-21 के लिए बढ़ी हुई उधारी की अनुमति दी जाएगी। इस दौरान जीएसडीपी के अतिरिक्त दो प्रतिशत की अनुमति दी गई थी, जिसमें से एक प्रतिशत को कुछ आर्थिक सुधारों के कार्यान्वयन पर सशर्त बनाया गया था।

राज्य कैसे करें आर्थिक स्थिति में सुधार

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय सार्वजनिक वित्त में सुधार के लिए हल्का धक्का देने वाली कहानी है। इस कहानी के मायने यह हैं कि राज्यों को अतिरिक्त धन प्राप्त करने के लिए प्रगतिशील नीतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। पीएम मोदी ने कहा कि इस अभ्यास के परिणाम न केवल उत्साहजनक हैं, बल्कि इस धारणा के विपरीत भी हैं कि तेज तर्रार आर्थिक नीतियों के सीमित खरीदार होते हैं।

उन्होंने अपने ब्लॉग में कहा कि जिन चार आर्थिक सुधारों से अतिरिक्त उधारी जुड़ी हुई थी (जीडीपी का 0.25 फीसद हर एक से जुड़ा था), उनकी दो विशेषताएं थीं। सबसे पहले प्रत्येक सुधार जनता और विशेष रूप से गरीब, कमजोर और मध्यम वर्ग के लिए जीवन में आसानी से सुधार से जुड़ा है। दूसरे, राज्यों के राजकोषीय स्थिरता को भी बढ़ावा देना है।

राशन कार्ड को आधार नंबर से जोड़ा जाए

पहले सुधार के तहत उन्होंने उल्लेख किया कि ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ नीति के तहत राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत राज्य के सभी राशन कार्डों को सभी परिवार के सदस्यों के आधार नंबर के साथ जोड़ा जाए। इसके साथ यह भी हो कि सभी उचित मूल्य की दुकानों में इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल उपकरण उपलब्ध हो।

फर्जी कार्ड और डुप्लिकेट सदस्यों के खत्म होने से मिलेगा वित्तीय लाभ

पीएम मोदी ने कहा कि इसका मुख्य लाभ यह है कि देश में कहीं से भी प्रवासी श्रमिक अपना राशन प्राप्त कर सकते हैं। नागरिकों को इन लाभों के अलावा फर्जी कार्ड और डुप्लिकेट सदस्यों के खत्म होने से वित्तीय लाभ होगा। 17 राज्यों ने इस सुधार को पूरा किया और उन्हें 37,600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी दी गई। उन्होंने कहा कि दूसरा सुधार, जिसका उद्देश्य व्यापार करने में आसानी में सुधार करना है। ऐसे में दूसरे सुधारों में राज्यों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि 7 अधिनियमों के तहत व्यापार से संबंधित लाइसेंसों का नवीनीकरण केवल शुल्क के भुगतान पर स्वचालित, ऑनलाइन और गैर विवेकाधीन हों।

व्यापार करने में आसानी हो, इंस्पेक्टर राज से मिले मुक्ति

दूसरे सुधार के तहत व्यापार करने में आसानी में सुधार लाने पर जोर दिया है।उन्होंने कहा कि कंप्यूटरीकृत रैंडम निरीक्षण प्रणाली का आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। इसमें अन्य अधिनियमों के तहत उत्पीड़न और भ्रष्टाचार को कम करने के लिए निरीक्षण की पूर्व सूचना देनी होगी। यह सुधार (19 कानूनों को शामिल करते हुए) सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए विशेष रूप से सहायक होंगे, जो इंस्पेक्टर राज के बोझ में सबसे अधिक पीड़ित हैं। यह एक बेहतर निवेश माहौल, अधिक निवेश और तेज विकास को भी बढ़ावा देगा। 20 राज्यों ने इस सुधार को पूरा किया और उन्हें 39,521 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी की अनुमति दी गई।

राज्य और नगरपालिकाएं छोटे स्तर पर खुद पैदा करें राजस्व

तीसरे सुधार के लिए पीएम मोदी ने कहा कि 15वें वित्त आयोग और कई शिक्षाविदों ने ठोस संपत्ति कराधान के महत्व पर जोर दिया है। राज्यों को संपत्ति कर और पानी व सीवरेज शुल्क की न्यूनतम दरों को शहरी क्षेत्रों में संपत्ति लेनदेन और वर्तमान लागत के लिए क्रमशः स्टांप शुल्क दिशा-निर्देश मूल्यों के अनुरूप अधिसूचित करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे शहरी गरीबों और मध्यम वर्ग को बेहतर गुणवत्ता वाली सेवाएं मिलेंगी, बेहतर बुनियादी ढांचे का समर्थन होगा और विकास को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि संपत्ति कर भी प्रगतिशील है। इससे शहरी क्षेत्रों में गरीबों को सबसे अधिक लाभ होगा। इस सुधार से नगरपालिका कर्मचारियों को भी लाभ होता है, जिन्हें अक्सर मजदूरी के भुगतान में देरी का सामना करना पड़ता है। 11 राज्यों ने इन सुधारों को पूरा किया और उन्हें 15,957 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी दी गई।

किसानों को करें मुफ्त बिजली की जगह प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण

चौथे सुधार के तहत किसानों को मुफ्त बिजली आपूर्ति के बदले प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) की शुरुआत करनी होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष के अंत तक पायलट आधार पर एक जिले में वास्तविक कार्यान्वयन के साथ एक राज्यव्यापी योजना तैयार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि जीएसडीपी के 0.15 फीसद की अतिरिक्त उधारी इससे जुड़ी है। इसका एक घटक तकनीकी और वाणिज्यिक घाटे में कमी करना और दूसरा राजस्व और लागत (प्रत्येक के लिए जीएसडीपी का 0.05 फीसद) के बीच के अंतर को कम करना है। यह वितरण कंपनियों के वित्त में सुधार करता है। पानी और ऊर्जा के संरक्षण को बढ़ावा देता है और बेहतर वित्तीय और तकनीकी प्रदर्शन के माध्यम से सेवा की गुणवत्ता में सुधार करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 13 राज्यों ने कम से कम एक घटक को लागू किया है, जबकि 6 राज्यों ने डीबीटी घटक को लागू किया है। नतीजतन उन्हें 13,201 करोड़ रुपये अतिरिक्त उधारी की अनुमति दी गई है।