प. बंगाल की सियासत: दिल्ली पहुंचे राज्यपाल, सीएम ममता को चुनाव बाद हिंसा की घटनाओं की दिलाई याद

प. बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ देर रात चार दिल्ली पहुंचे। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर राज्य में हिंसा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मैंने सीएम ममता बनर्जी को इस संबंध में पत्र लिखा था, लेकिन 6 महीने बीत जाने के बावजूद कोई भी अधिकारी, मंत्री या सीएम घटनास्थल पर पहुंचे।

इससे पहले राज्यपाल ने दिल्ली रवाना होने से कुछ घंटे पहले पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से उठाए गए मुद्दों पर जल्द बातचीत करने का आग्रह किया। उन्होंने बनर्जी को लिखे पत्र में कहा, ‘मैं चुनाव के बाद प्रतिशोधात्मक रक्तपात, मानवाधिकारों का हनन, महिलाओं की गरिमा पर हमला, संपत्ति का नुकसान, राजनीतिक विरोधियों की पीड़ाओं पर आपकी लगातार चुप्पी और निष्क्रियता को लेकर मैं विवश हूं।’ धनखड़ ने पत्र की प्रति ट्विटर पर भी पोस्ट की। उन्होंने कहा, ‘आपकी चुप्पी, लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए पुनर्वास और मुआवजे की खातिर किसी भी कदम का अभाव से यह निष्कर्ष निकलता है कि यह सब राज्य द्वारा संचालित है।’ जुलाई 2019 में पद संभालने के बाद से ही धनखड़ और तृणमूल सरकार आमने-सामने रहे हैं। उन्होंने राज्य में पुलिस-प्रशासन पर पक्षपात करने का भी आरोप लगाया है।

राज्यपाल ने पत्र में लिखा है कि 13 से 15 मई के बीच कूचबिहार, नंदीग्राम और असम के रणपगली की अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने उन लोगों की मर्मस्पर्शी पीड़ा सुनी थी जिन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अपनी पसंद के अनुसार मतदान किया था। उन्होंने लिखा कि गिरफ्तार लोगों की रिहाई के लिए मुख्यमंत्री ने 17 मई को अभूतपूर्व तरीके से निजाम पैलेस स्थित सीबीआई कार्यालय में छह घंटे बिताए।

ममता बनर्जी नारद स्टिंग टेप मामले में अपने मंत्रिमंडल के दो मंत्रियों सुब्रत मुखर्जी और एफ हकीम, पार्टी विधायक मदन मित्रा और कोलकाता के पूर्व मेयर सोवन चटर्जी की गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई कार्यालय गई थीं। राज्यपाल ने उनसे चुनाव बाद हिंसा के मुद्दे पर कैबिनेट में विचार करने, कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए सभी कदम उठाने और पीड़ित लोगों को सहायता मुहैया कराने का आग्रह किया।

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