प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित देशों से तेज़ टीकाकरण करने के दावे में कितनी सच्चाई है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना महामारी के दौरान 9वीं बार देश को संबोधित किया. इस संबोधन में उन्होंने दो बड़े एलान किए.

पहला – 21 जून से 18 साल से अधिक उम्र के सभी नागरिकों को मुफ़्त टीका लगाया जाएगा और केंद्र सरकार इसका ख़र्च उठाएगी.

दूसरा – गरीब कल्याण योजना के तहत नवंबर तक 80 करोड़ गरीब लोगों को मुफ़्त राशन दिया जाएगा.

लेकिन इन दो एलान के अलावा प्रधानमंत्री ने 33 मिनट के भाषण में कुछ बड़े दावे भी किए. इनमें से सबसे अहम दावा था भारत में टीकाकरण की रफ्तार को लेकर.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ”हमें याद रखना है कि दुनिया में भारत की वैक्सीनेशन की रफ़्तार काफ़ी तेज़ है और भारत वैक्सीनेशन के मामले में अनेक विकसित देशों से भी तेज़ है.’ ‘

प्रधानमंत्री ने ये दावा ऐसे वक़्त पर किया है जब देश में वैक्सीन की कमी के कारण 18 साल से अधिक उम्र वालों के लिए 1 मई से शुरू की गई टीकाकरण योजना को कई राज्यों ने रोक दिया है.
इस दावे में कितनी सच्चाई है, बीबीसी ने ये समझने के लिए भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के टीकाकरण के आँकड़ों की जानकारी जुटाई. इस तुलनात्मक अध्ययन के लिए हमने अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस का चुनाव इसलिए किया है क्योंकि दुनिया के सबसे विकसित देशों में इनकी गिनती होती है. साथ ही अमेरिका में टीकाकरण की गति से भारत की तुलना बार-बार स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी की जाती रही है.

वैक्सीन डोज़ का इस्तेमाल

जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मुताबिक़ 6 जून, 2021 तक अमेरिका में 30 करोड़ 16 लाख वैक्सीन की डोज़ का इस्तेमाल हुआ है.

ब्रिटेन में 6 जून तक 7 करोड़ 68 वैक्सीन की डोज़ इस्तेमाल की जा चुकी है.

इस तारीख़ तक जर्मनी में 5 करोड़ 65 लाख वैक्सीन डोज़ का इस्तेमाल किया गया है, जबकि फ़्रांस के लिए ये आँकड़ा 4 करोड़ से ज़्यादा थोड़ा ज़्यादा है.

जबकि भारत में 6 जून तक 23 करोड़ 27 लाख डोज़ इस्तेमाल हो चुकी है.

यानी वैक्सीन के डोज़ के इस्तेमाल में भारत, इन चारों देशों में दूसरे स्थान पर हैं.

कितने लोगों को लगी वैक्सीन

लेकिन केवल डोज़ के इस्तेमाल की बात कर हम इन देशों के टीकाकरण अभियान को नहीं समझ सकते. हर देश में इन डोज़ का इस्तेमाल कितने लोगों पर हुआ है, ये आँकड़े भी देखने होंगे.

अमेरिका में 7 जून तक 13 करोड़ 89 लाख से ज़्यादा लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी है.

ब्रिटेन में 6 जून तक 2.7 करोड़ से ज़्यादा लोगों का टीकाकरण पूरा हो चुका है.

जर्मनी में 1 करोड़ 81 लाख से ज़्यादा लोगों को पूरी तरह टीके लगाए जा चुके हैं.

फ्रांस में 1 करोड़ 29 हज़ार से ज़्यादा लोगों को वैक्सीन की दोनों खुराक़ मिली है

जबकि भारत में 6 जून तक 4 करोड़ लोगों का वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी है.

यानी लोगों के दोनों डोज़ के टीकाकरण की बात करें तो भारत फिर से दूसरे नंबर पर हैं. (नीचे का ग्राफ़ देंखें) . लेकिन अगर एक डोज़ वैक्सीन की बात करें तो भारत अमेरिका से आगे हैं. (ऊपर का ग्राफ़ देखें)

कितनी प्रतिशत आबादी का टीकाकरण हुआ

यहीं टीकाकरण के आँकड़े अगर आबादी प्रतिशत की कवरेज के आधार पर देंखेंगे तो भारत चारों देशों में सबसे पीछे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका की आबादी 32.8 करोड़ है, ब्रिटेन की आबादी 6.9 करोड़ है. जबकि भारत की आबादी 131 करोड़ है. जर्मनी और फ़्रांस भारत से आबादी के लिहाज से बहुत छोटे हैं.

इसलिए अमेरिका में टीकाकरण (दोनों डोज़) लगभग 42 फ़ीसद लोगों का हुआ है, ब्रिटेन में लगभग 41 फ़ीसद का, जर्मनी में 21 फ़ीसद और फ़्रांस में 19 फ़ीसद का टीकाकरण हुआ है.

जबकि भारत में सिर्फ़ 3.28 फ़ीसद लोगों को पूरा टीकाकरण हुआ है.

मतलब ये कि आबादी प्रतिशत में भारत की कवरेज सबसे कम है, क्योंकि भारत की जनसंख्या काफी ज़्यादा है.

कितने दिन में कहाँ लगा कितना टीका

अब जान लेते हैं, किस देश में टीकाकरण की शुरूआत कब हुई.

ब्रिटेन में टीकाकरण की शुरुआत सबसे पहले 8 दिसंबर 2020 को हुई. वहाँ एस्ट्राज़ेनेका और फ़ाइज़र वैक्सीन इस्तेमाल हो रही हैं. उसके बाद अमेरिका में टीकाकरण 14 दिसंबर, 2020 से शुरू किया गया है. वहाँ मॉडर्ना और फ़ाइज़र वैक्सीन इस्तेमाल की जा रही है. जर्मनी और फ़्रांस में टीकाकरण की शुरुआत एक साथ 27 दिसंबर, 2020 को हुई. दोनों देशों में फ़ाइज़र और मॉडर्ना वैक्सीन इस्तेमाल की जा रही है.

भारत में टीकाकरण सबसे देरी से 16 जनवरी 2021 से शुरू हुआ है और यहाँ एस्ट्राज़नेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन का स्थानीय वर्जन कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है.

ये पहला मौका नहीं है जब सरकार ने टीकाकरण रफ़्तार तेज होने का दावा किया है.

10 मई को स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ़ से हो रही प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी दावा किया गया था कि 17 करोड़ वैक्सीन भारत नें 114 दिन में लगाई और अमेरिका को लगाने में 115 और चीन को 119 दिन लगे थे.

हमने अपनी जाँच में पाया कि अमेरिका ने 7 अप्रैल को ही 17 करोड़ वैक्सीन डोज़ का इस्तेमाल किया है. यानी स्वास्थ्य मंत्रालय का अमेरिका के 115 दिन का किया गया दावा सही है. ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी के साथ इस रफ़्तार की तुलना नहीं हो सकती, क्योंकि आबादी के लिहाज से ये देश काफ़ी छोटे हैं.

इन आँकड़ों से साफ़ है भारत के तेज़ रफ़्तार टीकाकरण के दावे में आधार बताना सबसे ज़रूरी है, जो प्रधानमंत्री मोदी ने दावा करते समय नहीं बताया.

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