इमरान खान ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी से पहले अपना डर किया जाहिर

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी से पहले अपना डर जाहिर किया है. उन्होंने कहा है कि विदेशी सैनिकों की वापसी से पहले देश में राजनीतिक समझौता होना चाहिए, ताकि इसे गृहयुद्ध से बचाया जा सके. खान ने अपने आधिकारिक निवास पर समाचार एजेंसी रॉयटर्स से इस बारे में बातचीत की है और बताया कि वह अपने स्तर पर पूरी कोशिश कर रहे हैं.

पाकिस्तानी पीएम ने कहा, ‘इस समय पाकिस्तान में बहुत ज्यादा डर है और मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि हम अपने स्तर पर पूरी कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिकी सैनिकों के जाने से पहले वहां किसी तरह का राजनीतिक समझौता हो जाए.’ दरअसल अमेरिका ने कहा है कि वह इसी साल 11 सितंबर को अफगानिस्तान से अपने सभी सैनिकों की वापसी करा लेगा (Pakistan on Afghanistan Issue). 20 से अधिक सहयोगी देशों ने इसका पालन करने की योजना बनाई है. अमेरिका की घोषणा के बाद से अफगानिस्तान में तेजी से हिंसा बढ़ी है.

अमेरिका और उसके सहयोगी देश में शांति समझौते के लिए राजनीतिक स्थिति में सुधार करना चाहते हैं लेकिन इनके इस दबाव का तालिबान विरोध कर रहा है. इमरान खान ने कहा, ‘अमेरिका ने जब तारीख बताई कि वह अफगानिस्तान से कब जा रहे हैं, उसी पल से तालिबान को लग रहा है कि उसने युद्ध जीत लिया है.’ उन्होंने कहा कि अमेरिका के फैसले के बाद से तालिबान से किसी तरह की रियायत की उम्मीद नहीं की जा सकती है (Taliban in Afghanistan). खान ने कहा कि अगर गृहयुद्ध और शरणार्थी संकट होता है तो अफगानिस्तान के बाद सबसे ज्यादा नुकसान पाकिस्तान का होगा.

उन्होंने आगे कहा, ‘और फिर हमपर दबाव डाला जाएगा कि उसका हिस्सा बना जाओ.’ खान ने कहा कि वह अफगानिस्तान में ऐसी सरकार चाहते हैं जिससे पाकिस्तान दोस्ताना संबंध रख सके. उन्होंने कहा, ‘जिस भी अफगान सरकार का चयन लोग करेंगे पाकिस्तान उसके साथ डील करेगा.’ बता दें पाकिस्तान पर लंबे समय से ऐसे आरोप लगते आए हैं कि वह तालिबान के नेताओं और लड़ाकों को शरण देता है (Pakistan Helped Taliban). ये भी कहा जाता है कि पाकिस्तान ने ही साल 1996 में तालिबान को सत्ता तक लाने में मदद की थी. पाकिस्तान ने उस समय भी इस संगठन का साथ दिया, जब ये विदेशी सैनिकों से लड़ रहा था.