रूस का एक शहर लिउबर्त्सी, जहां एक विदेशी पर बेअसर हैं रूसी कानून

मास्को के बाहरी इलाके में मौजूद एक छोटा शहर लिउबर्त्सी इन दिनों सुर्खियों में है। वहां मौजूद एक कारखाने को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। ये कारखाना सोवियत जमाने का है। लिउबर्त्सी के निवासियों की ये लंबे समय से शिकायत रही है कि ये कारखाना उनके लिए मुश्किलें खड़ी करता है। इस कारखाने का मालिक स्विट्जरलैंड के नागरिक एडोल्फ गास्त हैं। कारखाने का नाम एवी उख्तोम्स्की एग्रीकल्चरल मशीनरी प्लांट है।

आखिर ये पूरा मामला क्या है, इस बारे में रूस की वेबसाइट रशियाटुडे.कॉम ने एक खास पड़ताल की। उसने शहर के मेयर और विवाद से जुड़े वकीलों से बातचीत की। इससे पता चला कि इस कारखाने के खिलाफ गड़बड़ियों के कई आरोप पहले से रहे हैं। कुछ मामलों में अदालतों के आदेश भी आए हैं। उसे लेकर स्थानीय प्रशासन अब इस कारखाने पर बकाया जमीन का किराया वसूल करना चाहता है। उसका दावा है कि जिस जमीन पर ये कारखाना स्थित है, उसे कभी गास्त को लीज पर नहीं दिया गया। आज उस जमीन की कीमत लाखों रुबल है। स्थानीय प्रशासन ने उन कई देशों में इस मामले में अर्जियां दी हैं, जहां इस कारखाने के दफ्तर हैं।

इसके बावजूद गास्त वर्षों से इस कारखाने के मालिक बने हुए हैं। इस दौरान यहां सस्ते किराए पर मिलने वाले हॉस्टल बनाए गए, जिनमें विदेशों से आव्रजक श्रमिकों को लाकर बसाया गया। स्थानीय प्रशासन का आरोप है कि कारखाने ने आग सुरक्षा संबंधी नियमों का भी उल्लंघन किया है। जमीन का मालिक ना होने के बावजूद उस पर खड़ी इमारतों का स्वामित्व अपने पास बनाए रखने के लिए गास्त ने कानूनी खामियों का इस्तेमाल किया है। वे हर कुछ साल भवनों के किरायेदार के तौर पर नया संदिग्ध करार करते रहे हैं।

रशिया टुडे ने जो दस्तावेज हासिल किए, उससे पता चलता है कि गास्त इस कारखाने से हर साल लाखों रुबल कमा रहे हैं, जिसे वे संदिग्ध ढंग से देश से बाहर भेज देते हैं। शहर में कोई निवेश नहीं होने के कारण इसकी हालत जर्जर होती गई है। रशिया टुडे के संवादादाता से एक स्थानीय अधिकारी ने कहा कि शहर का हाल ऐसा है कि यहां किसी वॉर मूवी की शूटिंग बिना किसी तैयारी या सेट लगाए की जा सकती है।

जानकारों ने बताया है कि 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद सोवियत जमाने में खड़ी की गई जायदाद की लूट मची थी। तत्कालीन राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के जमाने में कई विदेशियों ने भी यहां आकर संपत्ति हथिया ली। उसी समय गास्त भी यहां आए। साल 2000 में वे लिउबर्स्त्सी कारखाने के मालिक बन गए। तब इस कारखाना परिसर में 40 भवन थे। उनमें कुछ अब ढह गए हैं। बाकी गास्त के मालिकाने में हैं।

हैरतअंगेज यह है कि गास्त खुद 2004 के बाद कभी रूस नहीं आए। लेकिन लिउबर्त्सी में उनका साम्राज्य बना रहा है। इस दौरान उन्होंने रूस सरकार को ना के बराबर टैक्स दिया है। अदालती आदेशों को उन्होंने ठेंगे पर रखा है। स्थानीय अधिकारियों की उन्होंने कोई परवाह नहीं की है। लिउबर्त्सी का स्थानीय प्रशासन 2014 से जमीन का किराया वसूलने की कोशिश में जुटा है। ये रकम लगभग 83 करोड़ रुबल हो चुकी है। लेकिन इसमें उसे कामयाबी हाथ नहीं लगी है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक सख्त शासक समझा जाता है। लेकिन लिउबर्त्सी का मामला बताता है कि जिन देशी या विदेशी धनी लोगों ने सीधे उनकी सत्ता को चुनौती नहीं दी, उनसे निपटने में उनके प्रशासन ने कोई रुचि नहीं ली है।