भावनाएं जब आंखों का किनारा तोड़ जाए और आंसू प्रधानमंत्री को पोछना पड़े…

भावनाएं जब आंखों का किनारा तोड़ जाए और आंसू प्रधानमंत्री को पोछना पड़े। संसद की कार्यवाही जिससे देश को बहुत कुछ हासिल होता है। इसी हासिल में एक होता है किसी नेता का उभरना, लोकनीतियों के लिए बिल का गढ़ना और आतंरिक और बाहरी शक्तियों से कैसे मिलकर है लड़ना। राजनेताओं की आंख से ऐसे आंसू भावनाओं में डूबती-उतरती आवाज पब्लिक रैलियों में तो निकलती है। मगर सदन में तो पक्ष और विपक्ष होता है। सियासी तर्कों के बाण चलते हैं। अलग-अलग दलों के लोग आमने-सामने होते हैं। मगर कभी-कभी लोकतांत्रकि परंपरा में रिश्तें दलों का दायरा तोड़ जाते है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद की राज्यसभा से विदाई देते हुए इतना भावुक हुए कि देश आवाक रह गया। कांग्रेस और बीजेपी में हर वक्त तलवारें खिंची रहती हैं। लेकिन कांग्रेस नेता आजाद के राज्यसभा से विदाई पर प्रधानमंत्री के आंखों में आंसू थे। गला बार-बार भरा जा रहा था। 16 मिनट की इस तकरीर ने भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा की ऐसी तस्वीर पेश की जिसे सालों साल याद रखा जाएगा। अलामा इकबाल ने क्या खूब कहा था “दिल से जो बात निकलती है असर रखती है, पर नहीं ताकत ए परवाज मगर रखती है” अगर इन पंक्तियों में एक लाइन और जोड़ दें तो गुस्ताखी माफ हो। दिल से निकली आवाज का असर ऐसा है कि ”वो चुप भी करा देती है”। खामोश हुई संसद में प्रधानमंत्री के आंसू आख्य़ात हो गए। 16 मिनट के भाषण में पीएम मोदी 4 मिनट रोए, बार-बार रूके, पानी पिये फिर बोले। पीएम मोदी के भावुक भाषण का विश्लेषण थोड़ा आगे करेंगे। पहले आपको कुछ ऐसे घटनाक्रमों की तस्दीक कराते हैं जब देश प्रधानमंत्री के इमोशनल क्षण का साक्षी बना।

साल 2014 में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद संसदीय बोर्ड की बैठक में लाल कृष्ण आडवाणी ने नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव रखते हुए कहा था कि यह सब नरेंद्र भाई की कृपा है। नरेंद्र मोदी ने भावुक होते हुए आडवाणी ने आग्रह किया कि वे कृपा शब्द का प्रयोग न करें। एक बेटा अपनी मां पर कृपा नहीं करता है। बेटा समर्पण के साथ काम करता है। मैं भाजपा को अपनी मां मानता हूं। यह पहला अवसर था जब पूरे देश ने नरेंद्र मोदी को भावुक अंदाज में देखा था। इसके बाद अटल जी का जिक्र आते ही पीएम मोदी का गला भर आया था।

8 नवंबर 2016 जब देश में नोटंबदी की घोषणा हुई। उसके बाद लगातार पीएम मोदी के फैसले को लेकर सवाल उठ रहे थे। गोवा में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के शिलान्यास के बाद पीएम मोदी ने नोटबंदी पर बोलते हुए इस कदर भावुक हो गए कि उन्होंने कहा कि उन्होंने भी गरीबी देखी है और वह परेशानी को समझ सकते हैं। किसी को तकलीफ होती है तो मुझे भी होती है। आगे बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मैंने देश से सिर्फ पचास दिन मांगे हैं, 30 दिसंबर तक का वक्त दीजिए। उसके बाद अगर मोरी कोई गलती निल जाए, गलत इरादे निकल जाए। कोई कमी रह जाए तो जिस चौराहे पर खड़ा करेंगे खड़ा होकर, देश जो सजा देगा उसे भुगतने के लिए तैयार हूं। इस दौरान वो कई दफे भावुक होते नजर आए और भाषण के अंत तक उनकी आंखो से आंसू भी छलक आए।

21 अक्टूबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलिस स्मारक दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता के बाद से पुलिस जवानों द्वारा दिए गए सर्वोच्च बलिदान के सम्मान में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का उद्घाटन किया। पुलिस, पैरा मिलिट्री के जवानों के शौर्य को याद करते हुए पीएम मोदी भावुक हो गए। पीएम मोदी ने सारे राज्यों में तैनात पुलिस के जवानों, पैरा मिलिट्री के जवानों, कश्मीर जैसी जगहों पर आतंकवाद से लड़ रहे जवानों और आपदा की घड़ी में एनडीआरएफ के माध्यम से शौर्य में जुटे जवानों को याद किया। इस दौरान एक समय बोलते-बोलते पीएम मोदी भावुक हो गए और उनका गला भर आया।

7 मार्च 2020 को जन औषिधि दिवस पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान लाभार्थी दीपा शाह से बात करते वक्त प्रधानमंत्री भावुक हो गए थे। देहरादून की दीपा योजना के चलते अपना इजाज करवाने में सफलता पाई थी। उन्होंने अपनी जिंदगी को प्रधानमंत्री की देन बताते हुए उन्हें ईश्वर कहा था।

16 जनवरी 2021 को कोविड वैक्सीन अभियान की शुरुआत के मौके पर पीएम मोदी भावुक हो गए। पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कोविड वाॅरियर्स का आभार जताते हुए कहा कि कई साथी अस्पताल से घर वापस नहीं लौट सके। पीएम मोदी ने कहा कि लोगों ने एक बहुत लंबी लड़ाई लड़ी है। कई माताओं ने अपनी संतानों को इस लड़ाई में खो दिया।

7 सितंबर 2019 का वह क्षण जब भारतीय अंतरिक्ष संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के शिवन देश के महत्वकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 में आयी बाधा के बाद भावुक हो गये जिससे उनकी आंखों में आंसू आ गये और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें गले लगाकर ढांढ़स बधाया। इस दौरान पीएम भावुक दिखे। पीएम मोदी ने इसरो अध्यक्ष को काफी समय तक गले लगाए रखा और उनका हौसला बढ़ाया।

प्रधानमंत्री तब किस्सा सुनाने लगते हैं। 31 मई 2006 को डल झील के पास गुजरात के सैलानियों की बस पर आंतकवादी हमला हुआ था। गुजरात की कमान तब गुलाम नबी आजाद संभाल रहे थे। गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी थे। पीएम मोदी ने उस समय को याद किया। सबसे पहले गुलाम नबी जी का मुझे फोन आया…प्रधानमंत्री रुकते हैं। अगले सात सेंकेड फिर तीन शब्द बोलते हैं। और वो फोन…बस ये बोल कर अगले 9 सेकेंड फिर खामोशी। आवाज भरी हुई फिर कोशिश की बोलने की 22 सेकेंड भावुकता के बीच सिमट गए। आंसू रुक नहीं रहे थे। फोन पर उस समय प्रणब मुखर्जी साहह डिफेंस मिनिस्टर थे। मैंने उनको फोन किया…फिर रात में गुलाम नबी जी का फोन आता है…दोबारा गुलाम नबी का जिक्र आते ही फिर हाथ जुड़ जाते हैं। गला फिर भर जाता है। रूढ़े हुए गले ने शब्दों को बाहर आने से रोका फिर हिम्मत कर बोले..उन्होंने फोन किया और जैसे अपने परिवार के सदस्य की चिंता करे वैसी चिंता,..फिर पानी पिया।