यूपी की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति पर आनंदीबेन पटेल ने कहा, राज्य में विपक्ष जैसा कुछ भी नहीं

उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों की भूमिका पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने तंज कसा है। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में आनंदीबेन पटेल ने कहा कि राज्य में विपक्ष शायद ही मौजूद है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस समय विपक्ष जैसा कुछ भी नहीं है। वह सिर्फ याचिकाएं सौंपने के लिए आते हैं और खुद ही मेरे साथ फोटो खिंचवा लेते हैं। मैं भी उनके ज्ञापन को ले लेती हूं। उन्होंने कहा कि ज्ञापन लिखना विपक्ष का काम नहीं है। आनंदीबेन पटेल ने कहा कि उन्हें अपने संगठन को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए और अपना जनाधार को भी बढ़ाना चाहिए। विपक्ष को सलाह देते हुए आनंदीबेन पटेल ने कहा कि उन्हें घर-घर जाना चाहिए और यह पता करना चाहिए कि उनकी जरूरत क्या है और सरकार कहां गलत कर रही है?

आनंदीबेन पटेल ने अखिलेश यादव के हालिया बयान पर भी हमला किया। अखिलेश यादव ने हाल में ही कहा था कि वह कोरोना वैक्सीन नहीं लेंगे क्योंकि यह भाजपा का टिका है। इस पर आनंदीबेन पटेल ने कहा कि लोकतंत्र को एक शक्तिशाली और स्वस्थ विपक्ष की आवश्यकता होती है। ऐसा बयान देकर विपक्ष क्या कहना चाहता है? उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस का टीका और इससे जुड़े कार्य जनहित के लिए हैं। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और इसी लिए जरूरी है कि विपक्ष स्वस्थ रहे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस तरीके के बयान देने के बजाय विपक्ष को सामने आना चाहिए और लोगों के टीका लेने और आपदा से देश को लड़ने में मदद करना चाहिए।

मध्य प्रदेश की भी राज्यपाल की भूमिका संभाल रही आनंदीबेन पटेल ने कहा कि लोकतंत्र को एक स्वस्थ विपक्ष की हमेशा जरूरत होती है। जब उनसे महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 60 साल पहले की तुलना में महिलाओं के जीवन में निश्चित तौर पर बड़ा बदलाव आया है। लेकिन अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री रही आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आजकल के लड़के क्या करते हैं, इस पर नजर रखने का समय आ गया है। उन्होंने कहा की देरी से आने पर मां-बाप को उनसे सवाल पूछना चाहिए और इस पर भी नजर रखनी चाहिए कि उनकी कंपनी कैसी है। साथ ही साथ उन्होंने कहा कि लड़कियों को किसी भी प्रकार के विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करना भी माता-पिता की ही जिम्मेदारी होती है। इसके लिए उन्हें पौष्टिक भोजन दिया जाना चाहिए, स्कूल भेजा जाना चाहिए और आत्मरक्षा में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

टीबी से पीड़ित बच्चों की मदद करने के अपने फैसले पर उन्होंने बात करते हुए कहा कि टीवी या फिर किसी और स्वास्थ्य संबंधित चुनौती सिर्फ सरकारों की समस्या नहीं है। इससे निपटने में समाज की भी भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि अब तक मैंने 15000 से अधिक टीबी से पीड़ित बच्चों को गोद लिया है और उनमें से अब अधिकांश ठीक हो गए हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान राजनीति को देखें तो अखिलेश यादव अपने कार्यकर्ताओं के घर जाने के अलावा राज्यपाल से ज्ञापन सौंपने के लिए जरूर मुलाकात करते दिख जाते हैं। जबकि मायावती सिर्फ चुनाव के समय ही जमीन पर सक्रिय रहती हैं। दूसरी ओर भले ही कांग्रेस लगातार यह दावा करती हो कि वह उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन को मजबूत करने में जुटी हुई है लेकिन उसके बड़े नेता प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ट्विटर पर ही ज्यादा सक्रिय दिखाई देते हैं।