योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या को ‘वैदिक सिटी’ बनाने की कर दी है घोषणा

लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू होने के बाद अब ‘अयोध्या नगरी’ के विकास की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए टेंडर निकाला गया है। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या को ‘वैदिक सिटी’ बनाने की घोषणा कर दी है। जिसका मतलब साफ है कि विश्व के समक्ष अयोध्या को आकर्षण का केंद्र बनाया जाना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ‘वैदिक सिटी’ योजना को ध्यान में रखते हुए 1200 एकड़ का नया मॉडल सिटी स्थापित करने का विचार कर रही है। अयोध्या को हरा भरा बनाने के साथ इसका विकास धार्मिक और पर्यटन पर आधारित किया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि राम मंदिर निर्माण के बाद यहां पर सैलानियों का आवागमन बढ़ जाएगा। ऐसे में विदेशी पर्यटक भी भारी संख्या में पहुंचेंगे।

योगी सरकार में मंत्री विजय कश्यप ने हाल ही में मुख्यमंत्री के निर्देश पर अयोध्या में विकास कार्यों की समीक्षा की थी एवं अधिकारियों को तीव्र गति से काम करने का आदेश दिया था। बता दें कि अयोध्या को धार्मिक नगरी के साथ-साथ पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किया जाना है ताकि भगवान श्रीराम के दर्शन के साथ-साथ यहां पर लोग पर्यटन का भी लुत्फ उठा सकें। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि भगवान श्रीराम की नगरी ‘अयोध्या’ का विकास उसकी गरिमा के अनुकूल किया जाएगा। इसके लिए कई बड़ी योजनाएं लाई जा रही हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अयोध्या को हिन्दुओं के पवित्र शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। एक सलाहकार के चयन के लिए जारी टेंडर में कहा गया है कि कार्यान्वयन रणनीति और एकीकृत बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। विकास की योजना 30 वर्षों के लिए तैयार की जाएगी, जिसमें मुख्य शहर की विरासत को बरकरार रखने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही तीर्थयात्रियों के लिए रिवरफ्रंट और परिक्रमा मार्ग का विकास और मनोरंजक गतिविधियों के लिए सुविधाओं के अलावा बुनियादी ढांचे में वृद्धि की भी योजना है। वहीं, राम मंदिर निर्माण कार्य 2023 तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी ने टेंडर जारी कर दिया है और 22 जनवरी तक टेंडर डाला जा सकता है। इसके लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। जैसे कि कौन सी कंपनी टेंडर भर सकती है और उसे किन-किन नियमों का पालन कर पड़ेगा इत्यादि।