खुदरा व्यापारियों का मॉल मालिकों को अल्टीमेटम, नए समझौते के बिना नहीं खुलेंगे स्टोर्स

नयी दिल्ली। कोरोना महामारी की वजह से हुए देशव्यापी लॉकडाउन के बाद से मॉल पूरी तरह से बंद हो गए थे। जिन्हें अनलॉक के पहले चरण की गाइडलाइन्स के अनुसार 8 मई को खोला जा सकता है। लेकिन भारतीय मॉल्स को अब एक और चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि मॉल मालिकों और 350 ब्रांडों के खुदरा विक्रेताओं के बीच लड़ाई छिड़ गई है। खुदरा विक्रेताओं ने कहा कि किराए में छूट और नया किराया समझौते की मांग पूरी नहीं हुई तो वह मॉल को अलविदा कह सकते हैं।

इस, कदम के बाद खुदरा विक्रेताओं को उम्मीद है कि उनकी मदद की जाएगी। हालांकि आगे क्या होता है अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। लगभग 2 महीने से अधिक समय से जारी लॉकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था को काफी ज्यादा नुकसान हुआ है और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ही सरकार ने अनलॉक-1 की शुरुआत की है।

अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक फ्यूचर रिटेल के एमडी राकेश बियानी ने कहा कि हम मदद के बिना सर्वाइव नहीं कर पाएंगे और अगर हमारी मदद नहीं हुई तो आगे नौकरियों का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

एक बड़े वैश्विक परिधान ब्रांड के एक सीईओ ने बताया कि खुदरा विक्रेताओं ने मॉल मालिकों से एक प्रस्ताव का अनुरोध किया है। अंग्रेजी अखबार टीओआई ने डीएलएफ, एंबिएंस, नेक्सस, पैसिफिक, फीनिक्स ग्रुप, ओबेरॉय और मन्त्री जैसे मॉलों को भेजे जाने वाले अल्टीमेटम की एक प्रति देखी है।

कोविड-19 महामारी का व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए खुदरा विक्रेताओं ने मॉल मालिकों से किराये को फिर से ड्रा करें। 25 मई से जारी लॉकडाउन के चलते मॉल बंद हैं। ऐसे में उद्योग संगठनों, खुदरा विक्रेताओं और मॉल के मालिकों ने सरकार से अनुरोध किया है कि सरकार जल्द से जल्द शॉपिंग मॉल के संचालन की अनुमति प्रदान करें।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खुदरा विक्रेताओं ने एक अल्टीमेटम जारी करते हुए साफ कर दिया है कि जब तक स्पष्ट सौदा नहीं हो जाता है तबतक हम अपने स्टोर्स नहीं खोल सकते। आपको बता दें कि महज बेंगलुरू के फोरम मॉल ने ही अभी तक किराये में कुछ राहत दी है। जबकि बड़े मॉलों की तरफ से अभी कोई रिएक्शन सामने नहीं आया है।

कोरोना महामारी के बीच में यदि मॉल खुल जाते हैं तो स्टोर्स के भीतर ज्यादा लोगों को एक साथ जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उदाहरण के तौर पर यदि बिग बाजार जैसे बड़े स्टोर्स में एक साथ महज 20 लोगों को जाने की इजाजत मिलती है तो उन्हें सामान खरीदने में ज्यादा समय लगेगा। ऐसे में स्टोर्स के बाहर भीड़ काफी ज्यादा बढ़ सकती है और लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल सकती हैं।

हाल ही में एक सर्वे सामने आया है जिसके मुताबिक लॉकडाउन के दौरान उपभोक्ताओं का किराना दुकानों के प्रति भरोसा बढ़ा है। ‘डेलायट ग्लोबल स्टेट ऑफ दि कंज्यमूर ट्रैकर’ सर्वे में बताया गया कि देश के उपभोक्ता घरों में किराना सामान का भंडार नहीं कर रहे हैं।

सर्वे में कहा गया है कि पिछले छह सप्ताह के दौरान उपभोक्ता खर्च के तरीके में बदलाव आया है। सर्वे में 1,000 लोगों की राय ली गई है। सर्वे में शामिल 55 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे किराना या परचून के सामान पर अधिक खर्च करना चाहेंगे। वहीं 52 प्रतिशत ने रोजाना इस्तेमाल के घर के सामान पर अधिक खर्च करने की बात कही। इसके अलावा 72 प्रतिशत का कहना था कि वे स्थानीय किराना दुकान से सामान खरीदना चाहेंगे।

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