चंद्रयान-2 चंद्रमा के दूसरे मिशन पर जाने को तैयार

चाहे वो चांद से मोहब्बत हो या चंदा मामा की कहानियां धरती की धड़कनों में चांद हमेशा से धड़कता रहा है। वैसे तो चंद्रमा धरती का स्थायी उपग्रह है और इसके चमक ने हमेशा से इंसानों को अपनी ओर खींचा है। वैसे तो अब तक 12 लोग चांद पर कदम रख चुके हैं। लेकिन मोदी सरकार ने चांद को मुट्ठी में करने की ओर अपने कदम तेजी से बढ़ा दिए हैं। लाल किले से साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष मिशन को लेकर एक बहुत बड़ी बात कही थी कि वर्ष 2022 तक भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में गगन यान भेजने का संकल्प लिया है। मोदी ने अंतरिक्ष में भी भारतीयों को भेजने की बात लाल किले की प्राचीर से कही थी, जिस पर मुहर लग गई है। ऐसा बहुत कम होता है कि इतने कम वक्त में ही जो संकल्प किया उससे तय समय से पहले पूरा कर लिया जाए।

इसरो अपने महत्वाकांक्षी चंद्रयान-2 मिशन की टेस्टिंग के आखिरी राउंड में है। तमिलनाडु के महेंद्रगिरी और बेंगलुरु के ब्यालालू में फाइनल टेस्ट चल रहा है। इस मिशन को 9 जुलाई से 16 जुलाई के बीच भेजा जाना है। हालांकि इसरो के इस महत्वाकांक्षी मिशन की कई चुनौतियां भी हैं। धरती से चांद की दूरी 3844 किलोमीटर है। एक्यूरेसी मुख्य चीज है। यह चांद की ग्रेवेटी से प्रभावित है। इसके अलावा कॉम्युनिकेशन में देरी भी एक बड़ी समस्या होगी। कोई भी संदेश भेजने पर उसके पहुंचने में कुछ मिनट लगेंगे। सिग्ल्स के वीक होने की संभावना है। इसके अलावा बैकग्राउंड का शोर भी संवाद को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिका समेत कई देशों ने चांद के दक्षिणी ध्रुव के लिए ऑर्बिटल उपग्रह लांच किए हैं। इन ऑर्बिटल उपग्रहों ने चंद्रमा की परिक्रमा करते हुए चांद के दक्षिणी ध्रुव की तस्वीरें भेजी हैं। अगर चंद्रयान-2 चंद्रमा के दक्षिणी तो ऐसा करने वाला पहला देश बन जाएगा। इसरो ने अपने चंद्रयान-1 मिशन, वर्ष 2009 में भेजा था। इस मिशन में भी एक चंद्रमा का चक्कर लगाने वाला ऑर्बिटर और एक इम्पैक्टर था।