सीरियल ब्लास्ट: श्रीलंका, आधी रात से आपातकाल

कोलंबो। 8 बम धमाके और करीब 290 लोगों की मौत। रविवार सुबह हुए सीरियल ब्लास्ट के बाद पड़ोसी मुल्क श्रीलंका गम और खौफ में डूबा है। राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने आज आधी रात से देश में आपातकाल लागू करने का ऐलान किया है। इस बीच श्रीलंकाई सरकार ने पहली बार इन हमलों के लिए जिम्मेदार संगठन का नाम लिया है। सरकार के प्रवक्ता राजीथा सेनारत्ने ने सीरियल ब्लास्ट के लिए स्थानीय इस्लामी चरमपंथी संगठन नैशनल तौहीद जमात (NTJ) को जिम्मेदार ठहराया है।
श्रीलंका की नैशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल की ओर से सोमवार को देश में आधी रात से आपातकाल लगाने की सिफारिश की गई। विस्फोटों के मद्देनजर देश में फिर से कर्फ्यू भी लगाया जाएगा। यह सोमवार रात आठ बजे से लेकर मंगलवार तड़के चार बजे तक लगा रहेगा। राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने विस्फोटों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की है। समाचार पत्र डेली मिरर के अनुसार, समिति में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विजित माललगोडा शामिल हैं। राष्ट्रपति ने समिति को विस्फोटों से संबंधित सभी मामलों की जांच करने, इसकी पृष्ठभूमि और अन्य तथ्यों की जांच करने के और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

सीरियल ब्लास्ट में मरने वाले लोगों का आंकड़ा 290 तक पहुंच गया है। इसमें चार जनता दल सेक्युलर (JDS) के कार्यकर्ताओं समेत सात भारतीय भी शामिल हैं। जेडीएस नेता किसी कार्यक्रम में हिस्सा लेने श्रीलंका गए थे और वहां होटल में ठहरे हुए थे। बड़ी तादाद में लोगों के गंभीर रूप से घायल होने के कारण मरनेवाले लोगों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

श्रीलंका पुलिस इस हमले की कड़ियों को जोड़ने में लगी है। अब तक करीब 24 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। श्रीलंका सरकार में मंत्री सेनारत्ने के मुताबिक इस बात की जांच की जा रही है कि क्या इस संगठन को बाहर से मदद मिल रही थी।

ब्लास्ट के बाद चर्च में जहां-तहां बिखरी लाशें और मांस को लोथड़े। श्रीलंका में जिसने भी यह मंजर देखा, वह सदमे में है। लोगों की जुबां पर सवाल है-आखिर भगवान कहां है? ईस्टर के मौके पर जब हजारों लोग प्रार्थना के लिए चर्च पहुंचे थे, उस समय हमलावरों ने चर्च और होटलों को निशाना बनाया था। सुरक्षाबलों को सर्च ऑपरेशन के दौरान दो जिंदा बम और मिल चुके हैं। इन्हें बाद में डिफ्यूज कर दिया गया।

हमले में घायल हुए शांता प्रसाद घायल बच्चों को कोलंबो के हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। इस हमले के बाद उनके जेहन में सिविल वॉर की याद ताजा हो गई। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएफपी से बातचीत में कहा, ‘मैं अपने साथ 8 घायल बच्चों को लेकर गया। इनमें 2 बच्चियां 6 और 8 साल की थीं। मेरी बेटियों की उम्र भी लगभग यही है। उनके कपड़े खून से लथपथ थे। एक दशक के बाद ऐसी हिंसा फिर से देखकर दिल दहल गया।’ (एएफपी)

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