मोदी तुरंत फैसला लेने वाले नेता-वर्ल्ड मीडिया

वर्ल्ड मीडिया ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। इनमें कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद को तुरंत फैसला लेने वाले नेता के रूप में पेश किया। वहीं, पाक के सामने अपनी रणनीति तय करने की चुनौती है। भारत ने 26 फरवरी को तड़के 3.30 बजे पाक सीमा में घुसकर आतंकी कैम्पों को तबाह किया था।

1. न्यूयॉर्क टाइम्स (अमेरिका)

कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि ज्यादातर भारतीय आबादी खासकर मोदी के रूढ़िवादी हिंदू राजनीतिक आधार को इमरान खान के दूसरे प्रस्ताव को स्वीकार करने की काफी कम इच्छा थी। इमरान के इस प्रस्ताव का मकसद था कि मोदी को तनाव कम करने के लिए बातचीत करने के लिए राजी किया जाए। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की सीनियर फैलो एलिसा आयर्स के मुताबिक, ‘‘बीते कई दशकों से पाक के साथ थकाऊ प्रक्रिया चल रही है। पाक के आतंकी गुटों पर कार्रवाई न करने से भारत थका हुआ महसूस करने लगा है। भारतीयों को लगता है कि बातचीत के लिए पाक सही नहीं है।’’

बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि पाक की मौजूदा हालत बड़ी जंग लड़ने की नहीं है। उसकी अर्थव्यवस्था खस्ताहाल है। चीन समेत कई देश अब पाक पर आतंकी गुटों पर कार्रवाई का दबाव बना रहे हैं।

2. सीएनएन (अमेरिका)

जब दो बड़े देशों के बीच जंग होती है तो लोगों के अंजाम भुगतने की संभावना ज्यादा होती है। यही बात पाक में हाल ही में चुनकर सत्ता में आए इमरान खान और भारत में हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी की अगुआई करने वाले मोदी महसूस कर रहे हैं। भारत में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं। मौजूदा टकराव से बचने के लिए दोनों प्रधानमंत्रियों को अपने राजनीतिक भविष्य के लिए ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता और अविश्वास की खींचतान का सामना करना पड़ेगा। इमरान क्रिकेटर रहे हैं। वह रूढ़िवादी मुस्लिमों के बीच ‘नए पाकिस्तान’ के लोकलुभावन नारे के साथ सत्ता में आए हैं। इसके चलते भारत पर दबाव रहेगा।

3. वॉशिंगटन पोस्ट (अमेरिका)

एटमी ताकत वाले भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से सैन्य मुठभेड़ें चल रही हैं। हालांकि, पाक अब जंग के खतरे को टाल रहा है। गुरुवार को पाक संसद में इमरान खान ने अमन के पैगाम के तहत भारतीय पायलट को रिहा करने का ऐलान किया। इससे उपमहाद्वीप में तनाव तो कम होगा, लेकिन यह भी संभावना है कि भारत-पाक युद्ध की तरफ बढ़ सकते हैं। हाल में दोनों देशों के बीच करीब 50 साल बाद हवाई हमले हुए। दुनिया के नेताओं ने दोनों देशों को इसे रोकने के लिए कहा।

मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में राजनीतिक वैज्ञानिक और परमाणु रणनीतिकार विपिन नारंग का कहना है कि 26 फरवरी को भारत की तरफ से हुआ हवाई हमला 1971 के बाद से सबसे जबर्दस्त कार्रवाई है। मोदी ने खुद को अचानक फैसले लेने वाले नेता के रूप में पेश किया है, वहीं पाक को यही नहीं पता कि वह कहां वार कर सकता है।

4. डॉन (पाकिस्तान)

यह नरेंद्र मोदी का सोच-समझकर खेला गया जुआ है। वह मानते हैं कि उनका दुनिया में असर बढ़ रहा है, इसके चलते भारत इस तरह का खतरा मोल ले सकता है। पाक के सामने यह गंभीर चुनौती है कि वह किस तरह आगे की रणनीति तय करे। पाकिस्तान भारत के साथ बातचीत के जरिए समस्या सुलझाना चाहता है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव के चलते यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस्लामाबाद वाकई ऐसा करने में कामयाब हो पाएगा?

5. द गार्जियन (ब्रिटेन)

इमरान खान ने आश्चर्यजनक ऐलान किया कि वे भारतीय पायलट अभिनंदन वर्तमान को रिहा कर रहे हैं। लिहाजा इस्लामाबाद नई दिल्ली पर दबाव बनाएगा, जिससे तनाव कम हो। जब तक पाक यह पुष्टि नहीं कर देता कि वह अपनी जमीन पर मौजूद आतंकी गुटों पर कार्रवाई कर रहा है, तब तक भारत अपनी कार्रवाई जारी रख सकता है। यही वह मुद्दा है जिसके चलते बीते दो दिन में परमाणु संपन्न दो देश जंग के दरवाजे पर खड़े हो गए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *