ऐसे तैयार होते हैं, एक Pilot

इन पायलेट्स को ट्रेनिंग के लिए तीन लेवल से गुजरना होता है जिसके बाद ये असली फाइटर प्लेन के लिए ट्रेनिंग शुरू करते हैं।

ट्रेनिंग के पहले हिस्से में ट्रेनी पायलेट्स को प्लेन के बारे में टेक्निकल ट्रेनिंग और थ्योरी पढ़ाई जाती है। ये टेक्निकल ट्रेनिंग इन पायलेट्स को एक ट्रेनर एयरक्राफ्ट में दी जाती है। इस दौरान इन पायलेट्स को करीब 55 घंटे की फ्लाइंग करनी पड़ती है। साथ ही सिम्यूलेटर पर भी ट्रेनिंग पूरी करनी पड़ती है। सिम्यूलेटर एक वीडियो गेम की तरह होता है। जिसमें ट्रेनी बैठकर फ्लाइट के दौरान असली जैसे हालातों का सामना करता है। ये ट्रेनिंग करीब 6 महीने तक चलती है। पायलेट्स को 55 घंटे की ये ट्रेनिंग पिलेटस पीसी-7 एयरक्राफ्ट में पूरी की जाती है। जिसके बाद पायलेट दूसरे स्टेज की ट्रेनिंग शुरू करता है।

ट्रेनिंग के दूसरे हिस्से में पायलेट ये चुनते हैं की उन्हें किस तरह के एयरक्राफ्ट की ट्रेनिंग दी जाएगी। वे फाइटर, हेलिकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट प्लेन में से कोई एक चुन सकते हैं। इस ट्रेनिंग सैशन के दौरान फाइटर पायलेट्स को 6 महीने के अंदर करीब 80 घंटे की फ्लाइंग करनी पड़ती है। ये ट्रेनिंग किरण मार्क-2 नाम के जेट प्लेन में पूरी करनी होती है। इस ट्रेनिंग के दौरान कैडेट्स को इमरजेंसी के हालातों से भी गुजरना पड़ता है। उन्हें हर तरह की स्थिती में परखा जाता है।

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