क्या होगा अगर पाक के खिलाफ वर्ल्ड कप मैच न खेले भारत

‘वर्ल्ड कप में भारत को पाकिस्तान के खिलाफ नहीं खेलना चाहिए। चूंकि 16 जून को भारत का पाकिस्तान के साथ मुकाबला है, ऐसे में उसे वर्ल्ड कप का बॉयकॉट कर देना चाहिए…’ क्या आप यकीन कर सकते हैं कि ये शब्द देश और दुनिया के शीर्ष फिरकी गेंदबाज रहे किसी क्रिकेटर के होंगे। लेकिन हकीकत यही है कि यह बात कही है टर्बनेटर के नाम से विख्यात हरभजन सिंह ने। भज्जी का सवाल है, ‘सीधी सी बात है, क्या ज्यादा जरूरी है? क्या देश पहले आता है या भारतीय क्रिकेट? खेल को एक और रख दें। पहले हमें दूसरे मुद्दे सुलझाने चाहिए।’

उनकी हां में हां मिलाई है कलाई के जादूगर और पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने। इससे पहले पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन ने मोहाली स्टेडियम और हिमाचल क्रिकेट एसोसिएशन ने धर्मशाला मैदान में से पाकिस्तानी क्रिकेटरों की तस्वीरें दीवार से हटाकर देश के गुस्से को नई अभिव्यक्ति दी है। लेकिन ये याद रहे कि ये कोई वैयक्तिक पोर्ट्रेट नहीं थे। बल्कि ये सारी तस्वीरें दोनों स्टेडियम में हुए मैचों और उनके बाद अवार्ड कार्यक्रमों की हैं, जिनमें पाकिस्तानी क्रिकेटर भी नजर आ रहे हैं। देखा जाए तो कोई दिग्गज क्रिकेटर जब किसी स्टेडियम में खेलता है तो उस मौके की याद संजोना एक परंपरा ही तो है, यह किसी एक देश या क्रिकेटर का महिमामंडन नहीं है।

जाहिर है, पुलवामा हमले के बाद देश में राष्ट्रीय भावनाओं का ज्वार आया हुआ है। हर कोई पाकिस्तान को धूल में मिला देने की हुंकार भर रहा है… और कई लोग बल्कि शायद बहुसंख्यक तबका अति राष्ट्रवाद के उफान के बीच खेल को बलि चढ़ा देने को तैयार है। इस आग में घी डाला है आईपीएल के मुखिया राजीव शुक्ला ने। वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजीव ने यह कहकर इस बहस को जन्म दिया कि अगर सरकार मंजूरी नहीं देगी तो भारतीय टीम वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ नहीं खेलेगी। जाहिर है कि शुक्ला एक राजनेता हैं और माहौल को भांपकर ऐसा बयान देने से साफ है कि उनके खेल प्रशासक पक्ष पर राजनेता भारी पड़ गया।

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