22 हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा हटा ली गई

पुलवामा आतंकी हमले के बाद एक और बड़ा कदम मोदी सरकार ने उठाया है|  चार अलगाववादी नेताओं के बाद अब सरकार ने 18 और हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा हटा दी गई है| इसके अलावा जम्मू और कश्मीर के 155 राजनीतिक व्यक्तियों की भी सुरक्षा में बदलाव किया गया है. गृह मंत्रालय की ओर से सुरक्षा हटाए जाने या कम करने को लेकर एडवाइजरी जारी कर दी गई है. मोदी सरकार की इस कार्रवाई के बाद अब सभी 22 हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा हटा ली गई है.

जिन नेताओं की सुरक्षा हटाई गई है, उनमें एसएएस गिलानी, आगा सैयद मोसवी, मौलवी अब्बास अंसारी, यासीन मलिक, सलीम गिलानी, शहीद उल इस्लाम, जफर अकबर भट, नईम अहमद खान, मुख्तार अहमद वाजा, फारूक अहमद किचलू, मसरूर अब्बास अंसारी, आगा सैयद अबुल हुसैन, अब्दुल गनी शाह और मोहम्मद मुसद्दिक भट शामिल है.

अतना ही नहीं 155 राजनीतिक व्यक्तियों और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा में भी सरकार की ओर से अब अहम बदलाव किए गए हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक, इन हुर्रियत नेताओं और राजनीतिक व्यक्तियों की सुरक्षा में 1000 से अधिक पुलिसकर्मी और 100 से अधिक सरकारी गाड़ियां लगी हुई थीं, जो अब वापस ले ली गई हैं।

मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाले हुर्रियत कांफ्रेस ने एक बयान में कहा, “सरकार ने खुद ही अलगाववादी नेताओं को सुरक्षा मुहैया कराने का फैसला लिया, जिसकी कभी मांग नहीं की गई।”

मीरवाइज उमर फारूक, उन पांच अलगाववादी नेताओं में शामिल हैं, जिनकी सुरक्षा वापस ली गई है।

बयान में आगे कहा गया, “मीरवाइज उमर फारूक ने वास्तव में कई बार शुक्रवार के उपदेश के दौरान कहा कि वह चाहते हैं कि सुरक्षा वापस ले ली जाए।”

बयान में कहा गया, “सुरक्षा वापस लेने के फैसले से न तो अलगाववादी नेताओं के रुख में बदलाव आएगा न हीं इससे जमीनी हालात पर कोई असर पड़ेगा।”

मीरवाइज के अलावा प्रशासन ने रविवार को अब्दुल गनी भट, बिलाल लोन, हाशिम कुरैशी व शबीर शाह की सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया है।

 

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