सोचा नहीं था अनुसंधान इस दिशा में बढ़ेगा: जेम्स एलिसन

ह्यूस्टन। चिकित्सा क्षेत्र के 2018 के नोबेल पुरस्कार विजेता जेम्स एलिसन ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका अनुसंधान इस दिशा में बढ़ेगा। अमेरिकी इम्यूनोलॉजिस्ट एलिसन और जापान के तासुकू होंजो को सोमवार को 2018 के नोबेल चिकित्सा पुरस्कार का संयुक्त विजेता घोषित किया गया। उन्होंने इस क्षेत्र में अनुसंधान किया कि शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली कैंसर से किस तरह लड़ सकती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर में इम्युनोथैरेपी प्लेटफॉर्म के कार्यकारी निदेशक एलिसन को शरीर में ट्यूमर के बजाय प्रतिरक्षा प्रणाली का उपचार करके कैंसर का मुकाबला करने के नये प्रभावी तरीके को ईजाद करने के लिए चिकित्सा का 2018 का नोबेल पुरस्कार विजेता घोषित किया गया है। वह विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्रों में असाधारण खोजों के लिए दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान पाने वाले एमडी एंडरसन केंद्र के पहले वैज्ञानिक हैं। स्टॉकहोम में नोबेल असेंबली ऑफ कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट ने 70 वर्षीय एलिसन और जापान की क्योटो यूनिवर्सिटी के 76 वर्षीय होंजो को पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा, ‘ट्यूमर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली की क्षमता बढ़ाकर इस वर्ष के नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने कैंसर के उपचार का एक बिल्कुल अलग सिद्धांत प्रतिपादित किया है।’

एलिसन ने कहा, ‘मैं इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को पाकर सम्मानित और आह्लादित महसूस कर रहा हूं। वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा पाने का तरीका केवल ज्ञान की सीमाओं का विस्तार करना है। मैंने कभी कैंसर के अध्ययन की शुरूआत नहीं की थी, बल्कि टी कोशिकाओं (टी लिंफोसाइट) के जीवविज्ञान को समझने पर ध्यान केंद्रित किया था, जो कोशिकाएं हमारे शरीर में पहुंचकर हमें सुरक्षित करने का काम करती हैं।’