लेडी कॉन्स्टेबल ने पानी में कूद फंसे हुए लोगों को निकाला

पुणे। पुणे की दत्तावाड़ी पुलिस चौकी में कॉन्स्टेबल नीलम गायकवाड़ गुरुवार को पहुंचीं और अपना रोज का काम करने लगीं। तभी उन्हें एक सीनियर का फोन आया। उनसे मूठा नदी के किनारे के निचले इलाके जनता वसहाट में स्थिति का जायजा लेने के लिए कहा गया। वहां पर नहर की दीवार टूटने से बाढ़ सी स्थिति पैदा हो गई थी। वह फौरन मौके पर पहुंचीं और डेढ़ घंटे तक लोगों, खासकर महिलाओं और बच्चों को, पानी से बाहर निकालती रहीं। इन लोगों को इस स्थिति का बिलकुल अंदेशा नहीं था, इसलिए वह बिना मदद के वहां फंसे थे।
नीलम ने बताया कि जब वह पहुंचीं तो मानो लोग पानी में बह रहे थे। पानी बढ़ता जा रहा था और उन्हें बचाने के लिए कोई नहीं था। उन्होंने बताया, ‘मैंने अपना पर्स और मोबाइल एक अजनबी को थमाया और पानी में कूदने को तैयार हो गई। जब मैं अपने जूते निकाल रही थी तो मैंने देखा कि एक दुकान का मालिक खुद को डूबने से बचाने की कोशिश कर रहा है। मैंने पास के गराज से एक टायर उठाया और दुकानदार की ओर फेंका जिससे वह तैरता रह सके।’

उन्होंने बताया कि महिलाएं और बच्चे यहां-वहां थे और घबराहट में परिजन एक-दूसरे को ढूंढ नहीं पा रहे थे। पानी उनके पेट तक पहुंच दया था। उन्होंने बच्चों को पीठ पर लादकर निकाला। करीब 15 लोगों को इस तरह सुरक्षित जगह पर पहुंचाने वाली 28 साल की इस बहादुर महिला को लोगों ने खूब दुआएं दीं। नीलम ने जिन जैनब रिजवी के बेटे और छाया वाघमारे को बचाया वे उनका धन्यवाद करते नहीं थक रही थीं।

वहीं, दत्तावाड़ी पुलिस स्टेशन के लोग इस बात से जरा भी हैरान नहीं हैं। सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर देवीदास बताते हैं कि नीलम हमेशा ऐसे स्थितियों में आगे ही रहती हैं। उन्होंने बताया, ‘वह पुणे पुलिस की सबसे बहादुर पुलिस अफसरों में से एक हैं। इस हफ्ते गणपति विसर्जन के वक्त उन्होंने ट्रैफिक कंट्रोल करने और शराबियों को संभालने में अहम भूमिका निभाई थी लेकिन वह कानून तोड़ने वालों और अपराधियों से निपटते वक्त भी उतनी ही आक्रामक होती हैं।

लगभग एक साल पहले नीलम उस वक्त चर्चा में आई थीं जब उन्होंने ऐक्सिडेंट में घायल एक शख्स को अस्पताल पहुंचाया था। अस्पताल महिलाओं और बच्चों के लिए खास होने पर वह साथियों की मदद से ऐंबुलेंस का इंतजाम कर पीड़ित को दूसरे अस्पताल ले गई थीं।