सुप्रीम कोर्ट में अब अयोध्या मुख्‍य मामले की सुनवाई 29 से होगी शुरू

नयी दिल्ली. राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद मालिकाना हक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के 1994 के फैसले पर बड़ी पीठ द्वारा पुनर्विचार करने की मांग करने वाली मुस्लिम समूह की याचिकाओं पर सुनवाई जारी है. इसपर देशभर की निगाहें हैं. जस्टिस अशोक भूषण फैसला पढ़ रहे हैं. 1994 के इस्माइल फारूकी के केस पर जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि हर फैसला अलग हालात में होता है. तीन जजों की बेंच यह फैसला सुना रही है. किसी भी वक्त फैसला आ सकता है.

फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि मस्जिद में नमाज का मामला संविधान पीठ को नहीं जाएगा. तीन जजों में से दो जजों ने कहा कि मस्जिद में नमाज का मामला सात जजों वाली बेंच को नहीं भेजा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत की संस्कृति महान है. अशोक का शिलालेख है, हर धर्म महान है, शासन किसी एक धर्म को अलग से महत्व नहीं देता है.

दरअसल, न्यायालय ने उस फैसले में कहा था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति अशोक भूषण तथा न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ अपना फैसला सुनाएगी। पीठ ने 20 जुलाई को इसे सुरक्षित रख लिया था. अयोध्या मामले के एक मूल वादी एम सिद्दीक ने एम इस्माइल फारूकी के मामले में 1994 के फैसले में इन खास निष्कर्षों पर ऐतराज जताया था जिसके तहत कहा गया था कि मस्जिद इस्लाम के अनुयायियों द्वारा अदा की जाने वाली नमाज का अभिन्न हिस्सा नहीं है.
सिद्दीक की मृत्यु हो चुकी है और उनका प्रतिनिधित्व उनके कानूनी वारिस कर रहे हैं. मुस्लिम समूहों ने प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यह दलील दी है कि इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट के अवलोकन पर पांच सदस्यीय पीठ द्वारा पुनर्विचार करने की जरूरत है क्योंकि इसका बाबरी मस्जिद – राम मंदिर भूमि विवाद मामले पर असर पड़ेगा.

वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने सिद्दीक के कानूनी प्रतिनिधि की ओर से पेश होते हुए कहा था कि मस्जिदें इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है, यह टिप्पणी उच्चतम न्यायालय ने बगैर किसी पड़ताल के या धार्मिक पुस्तकों पर विचार किये बगैर की. उत्तर प्रदेश सरकार ने शीर्ष न्यायालय से कहा था कि कुछ मुस्लिम समूह ‘इस्लाम का अभिन्न हिस्सा मस्जिद के नहीं होने’ संबंधी 1994 की टिप्पणी पर पुनर्विचार करने की मांग कर लंबे समय से लंबित अयोध्या मंदिर – मस्जिद भूमि विवाद मामले में विलंब करने की कोशिश कर रहे हैं.