लोकसभा में एससी-एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर फिर एक तीखी बहस, कांग्रेस ने की मोदी सरकार को घेरने की कोशिश

नई दिल्ली। गुरुवार को लोकसभा में एससी-एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर फिर एक तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि इस दौरान सरकार ने तमाम अध्यादेश पास कराए लेकिन दलितों और आदिवासियों के हित और उनकी रक्षा करने वाले ऐक्ट की मजबूती पर अध्यादेश नहीं ला सका। हालांकि सरकार की तरफ से भी कहा गया कि कैबिनेट ने इसपर बिल को पारित कर दिया है और इसे इसी सत्र में पास कराया जाएगा। दरअसल कांग्रेस ने एक तरह से दलितों और आदिवासियों के मुद्दे पर एक बार फिर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की।
गुरुवार को कांग्रेस के सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में एससी-एसटी ऐक्ट का मुद्दा उठाया। खड़गे ने कहा कि सरकार ने इस बीच कई ऑर्डिनेंस आए लेकिन एससी-एसटी ऐक्ट के ऊपर क्यों अध्यादेश नहीं लाए, इसपर सफाई दें। खड़गे ने कहा. ‘इस तबके पर देश में हर 15 मिनट पर अत्याचार होता है। इसपर अध्यादेश लाना चाहिए था। इसपर बिल पेश किया जाए। हम सरकार से मांग करते हैं कि इसपर कल अध्यादेश लाया जाए हम सर्वसम्मति से इसे पास कराएंगे।’

मोदी सरकार की तरफ से जवाब देने के लिए खड़े हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि खड़गे ने जो सवाल खड़ा किया है उससे आश्चर्य हुआ है। गृहमंत्री ने कहा कि शायद इन्हें जानकारी हो चुकी है कि मोदी कैबिनेट ने इस बिल को अप्रूव कर दिया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि एससी-एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इस प्रकार का संदेश गया था कि ऐक्ट कमजोर हुआ। तब पीएम मोदी ने वादा किया था कि इसे कमजोर नहीं होने देंगे।

राजनाथ सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तत्काल बाद पीएम ने कहा था कि जरूरत पड़ी तो इससे भी कड़ा बिल लाएंगे। उन्होंने खड़गे के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि इस बिल को इसी सत्र में पास कराया जाएगा। आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने बुधवार को एससी-एसटी ऐक्ट के मूल प्रावधानों को बहाल करने संबंधी विधेयक के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसे मौजूदा संसद सत्र में ही पास कराए जाने की भी तैयारी है। इससे पहले एनडीए के कई घटक दल इस मुद्दे पर काफी आक्रामक तेवर अपनाए हुए थे।

रामविलास पासवान की पार्टी एलजेपी ने तो आंदोलन की धमकी तक दे डाली थी। इस मसले पर केंद्र सरकार के खिलाफ दलित संगठनों ने भारत बंद का आयोजन किया था। 2 अप्रैल को हुए भारत बंद के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थीं। बीजेपी के भी कुछ दलित सांसदों ने इस मसले को पार्टी के भीतर प्रमुखता से उठाया था।