असम में आज नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) का अंतिम मसौदा जारी, संसद में संग्राम

नयी दिल्ली। असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मुद्दे पर कांग्रेस, सपा और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों के हंगामे की वजह से आज राज्यसभा की बैठक एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। हंगामे की वजह से आज उच्च सदन में शून्यकाल और प्रश्नकाल नहीं हो पाए। असम में एनआरसी का बहुप्रतीक्षित दूसरा और अंतिम मसौदा आज जारी हुआ है। असम के नागरिकों की पहचान के लिए सबूत माने जाने वाले एनआरसी का पहला मसौदा 31 दिसंबर और एक जनवरी की मध्य रात्रि को जारी हुआ था। आज जारी दूसरे और अंतिम मसौदे को लेकर ही उच्च सदन में कांग्रेस, सपा और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा किया।

सभापति एम वेंकैया नायडू ने जैसे ही सदन में शून्यकाल शुरू करने को कहा, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने एनआरसी का मुद्दा उठाया। उनकी पार्टी के सदस्यों के साथ ही कांग्रेस और सपा के सदस्यों ने भी एनआरसी के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की। नायडू ने कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर चर्चा के लिए न तो कोई नोटिस मिला है और न ही कोई पत्र मिला है। उन्होंने कहा कि आज कुछ सदस्यों ने उनसे मुलाकात की और कहा कि आज वह एनआरसी का मुद्दा सदन में उठाना चाहते हैं। सभापति ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद ही गृह मंत्री से सदन में आने का अनुरोध किया था ताकि सदस्यों के सवालों के जवाब दिए जा सकें। नायडू ने सदस्यों से शांत होने की अपील करते हुए कहा कि वह स्वयं चाहते हैं कि एनआरसी के मुद्दे पर सदन में चर्चा हो। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह सदन में मौजूद हैं और वह चाहेंगे कि गृह मंत्री एनआरसी के मुद्दे पर अपना पक्ष रखें।
उधर असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के अंतिम मसौदे के प्रकाशन के मद्देनजर लोगों से ‘‘उकसावे’’ वाली टिप्पणियां करने से बचने का अनुरोध किया है।एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, कल रात सर्वदलीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने उच्चतम न्यायलाय की प्रत्यक्ष देखरेख में एनआरसी तैयार करने का ‘‘अत्यंत कठिन’’ काम सफलतापूर्वक पूरा करने में असम के लोगों की भूमिका की सराहना की।विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों ने भी एनआरसी तैयार करने में शामिल अधिकारियों को समर्थन देने पर सहमत जताई।  पार्टियों ने कहा कि वे असली आवेदकों को आवश्यक कानूनी सहायता देंगी।उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि अगर उनके नाम सूची में नहीं है तो वह घबराए नहीं क्योंकि ‘‘सभी असली आवेदकों को दावों और आपत्तियों के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।’’ बंदी बनाने के डर को खारिज करते हुए सोनोवाल ने कहा कि अंतिम मसौदे के प्रकाशन के बाद किसी को भी हिरासत केंद्र में नहीं भेजा जाएगा।