यमन के विद्रोही नेता का फैसला, मुख्य बंदरगाह का नियंत्रण UN को देंगे

पेरिस। यमन के हूती विद्रोहियों के प्रमुख ने कहा है कि वह मुख्य बंदरगाह हुदैदा का नियंत्रण संयुक्त राष्ट्र को इस शर्त पर सौंपने को तैयार है कि सरकार समर्थित सऊदी नीत सैन्य गठबंधन अपने हमलों को रोके। फ्रांस के एक समाचार-पत्र ने यह खबर दी है। ली फिगारो के साथ अब्देल मलेक अल हूती ने एक साक्षात्कार में कहा, “हमने संयुक्त राष्ट्र के दूत मार्टिन ग्रिफिथ्स को बताया कि बंदरगाह पर निरीक्षण और लॉजिस्टिक्स के प्रबंधन में संयुक्त राष्ट्र जो भूमिका चाहता है हम उस से इंकार नहीं कर रहे लेकिन इसकी शर्त होगी कि गठबंधन हुदायदा के खिलाफ आक्रमकता को रोके।

युद्ध ग्रसित यमन अपना 90 प्रतिशत भोजन आयात के जरिए जुटाता है जिसमें से 70 प्रतिशत हुदायदा बंदरगाह से होकर गुजरता है और युद्ध के चलते संयुक्त राष्ट्र को यहां मानवीय आपदा का अंदेशा है। यमन पहले से ही अकाल के कगार पर खड़ा है। रेड सी बंदरगाह पर वर्ष 2014 से ही विद्रोहियों का नियंत्रण है जब उन्होंने सरकार को राजधानी सना और देश के ज्यादातर हिस्से से बाहर कर दिया था। इस साल की शुरूआत में सऊदी – नीत गठबंधन ने बंदरगाह की यह कहते हुए लगभग पूरी तरह घेराबंदी कर दी थी कि उसका धुर विरोधी ईरान इसका इस्तेमाल विद्रोहियों तक हथियार पहुंचाने के माध्यम के तौर पर कर रहा है।