कानून मंत्री ने जस्टिस गोगोई के अगले चीफ जस्टिस बनने पर दिया जवाब

नई दिल्ली। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि अगले चीफ जस्टिस की नियुक्ति तयशुदा परम्परा के अनुसार होगी। इस बारे में केन्द्र सरकार की नीयत पर संदेह व्यक्त न किया जाए। उच्चतर न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए दो साल लटके एमओपी पर न्यायपालिका से सरकार की बातचीत जारी है। कानून मंत्री ने कहा कि मौजूदा चीफ जस्टिस अपने उत्तराधिकारी की अनुशंसा करते हैं। यह परम्परा है। उनकी अनुशंसा का सरकार पालन करती है।

जस्टिस गोगोई के अगले चीफ जस्टिस बनने की अटकलों पर पूछे गए सवाल के जवाब में विधि मंत्री ने यह बात कही। गौरतलब है कि मजूदा चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा दो अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। 22 जून को वरिष्ठतम जज जस्टिस चेलामेश्वर के रिटायर होने पर जस्टिस रंजन गोगोई वरिष्ठतम जज हो जाएंगे। आपातकाल को छोड़कर आजादी के बाद वरिष्ठतम जज को चीफ जस्टिस नियुक्त किया जाता रहा है। जस्टिस रंजन गोगोई उन चार न्यायाधीशों में शामिल थे जिन्होंने 12 जनवरी को संवाददाता सम्मेलन के जरिए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। चार न्यायाधीशों ने यह भी कहा था कि देश के लोकतंत्र पर खतरे के बाद मंडरा रहे हैं। उसके बाद ही अगले चीफ जस्टिस के नाम को लेकर न्यायपालिका और उसके बाहर र्चचाओं का बाजार गर्म है। गौरतलब है कि जस्टिस गोगोई के बाद वरिष्ठता क्रम में जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ हैं। यह दोनों जज भी 12 जनवरी की प्रेस कांफ्रेस में शामिल थे। उसके बाद बाद वरिष्ठता में जस्टिस अर्जन कुमार सीकरी आते हैं। कानून मंत्री मोदी सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर अपने मंत्रालय की उपलब्धियों पर संवाददाताओं को सम्बोधित कर रहे थे। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए मेमोरेंडम ऑफ प्रोसिजर(एमओपी) के अंतिम रूप न ले पाने पर कानून मंत्री ने कहा कि एमओपी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से बातचीत जारी है। गौरतलब है कि एमओपी को लेकर तत्कालीन चीफ जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर ने कड़ा रुख अपनाया था। काफी जद्दोजहद के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एमओपी को अंतिम रूप देकर सरकार के पास भेज दिया था। लेकिन लगभग दो साल से सरकार इस पर कोई निर्णय नहीं ले पाई है। कानून मंत्री ने विपक्ष के इस आरोप को निराधार बताया कि न्यायपालिका में नियुक्तियां नहीं हो रही हैं। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट में 17 न्यायाधीशों की नियुक्ति की (हालांकि मोदी सरकार की चार साल की उपलब्धियों पर जारी पुस्तिका में यह संख्या 18 बताई गई है)। हाई कोटरे में 331 न्यायाधीशों को नियुक्त किया गया और 313 अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थाई किया गया। अधीनस्थ न्यायपालिका में पांच हजार से ज्यादा पद रिक्त पड़े हैं। कानून मंत्री ने कहा कि जिला अदालतों में न्यायाधीशों की नियुक्ति का अधिकार संबंधित हाई कोटरे को है। इसमें सरकार हस्तक्षेप नहीं करती। सरकार हाई कोटरे की स्वायत्ता का सम्मान करती है। तीन तलाक पर लाए गए कानून को राज्य सभा से पारित होने में आ रही दिक्कतों पर कानून मंत्री ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से समर्थन का आह्वान किया। चुनाव में डाटा के दुरुपयोग पर उन्होंने कहा कि इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।