भय्यू महाराज सुसाइड केस : सात दिन पहले से भारी तनाव में थे

इंदौर. भय्यू महाराज सुसाइड केस में पुलिस को नई जानकारियां मिली हैं। पता चला है कि खुद को गोली मारने के सात दिन पहले से महाराज भारी तनाव में थे। तनाव केवल पत्नी और बेटी कुहू का ही नहीं, बल्कि दूसरे का भी। कई ट्रस्टी धीरे-धीरे पद छोड़ चुके थे। उद्योगपति और दानदाता लगातार कम हो रहे थे। पुलिस के अनुसार, घर में ही धमकी मिलती थी कि उनका चरित्र खराब कर दिया जाएगा। बेटी को लंदन भेजने और पत्नी के बीच चल रहे मनमुटाव से वे रोज जूझ रहे थे। बेटी को लंदन शिफ्ट करने में 10 लाख रुपए से ज्यादा खर्च हो रहे थे। घर के लोग इस पर भी एेतराज जता रहे थे। पारिवारिक सूत्रों से पुलिस को पता चला कि उन्हें अपनी छवि खराब होने का सबसे ज्यादा डर था।

पुलिस को यह भी पता चला है कि आत्महत्या से दो दिन पहले भय्यू महाराज ने किसी से 10 लाख रुपए के लोन की चर्चा की थी। शायद यह लोन वे बेटी को लंदन भेजने के लिए लेना चाह रहे थे। इसको लेकर भी परिवार में विवाद होता रहता था। वहीं, पत्नी के परिवार वाले महाराज की हर गतिविधियों पर उनकी नजर रखते थे।

कुछ कॉल आते ही वे विचलित नजर आ जाते थे। कई बार सेवादार विनायक और अन्य लोगों को दूर कर अकेले में बात करते थे। एक कंस्ट्रक्शन व्यवसायी का फोन आने पर वह असहज हो जाते थे। यह बात उनकी पत्नी के माता-पिता ने भी मानी है। उन्होंने जिन नंबरों पर सबसे ज्यादा बातें की, वे बेटी, पत्नी, विनायक, पड़ोसी मनमीत अरोरा और पुणे के सेवादार अनमोल चह्वाण के हैं।

दूसरी शादी के बाद से महाराज का वर्चस्व कम होने लगा था। सूर्योदय ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों ने धीरे-धीरे कर उनका साथ छोड़ दिया था। इसलिए उन्हें किसी पर ज्यादा विश्वास नहीं हो रहा था। गरीब लोगों के लिए जो सेवा कार्य श्री सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट ने शुरू किए थे, उनका व्यवस्थित संचालन नहीं होने का डर भी सता रहा था। महाराष्ट्र से आने वाले भक्तों की संख्या भी घट गई थी।

यह भी पता चला है कि महाराज ने सात-आठ महीने में अपनी कई संपतियों का डिस्पोजल कर दिया था। वे सब कुछ समेटकर बेटी को लंदन भेजकर सेट करने के प्रयास में थे। हालांकि पत्नी और ससुराल के लोगों का दखल उनकी जिंदगी में तेजी से बढ़ रहा था।

कुहू ने कहा, ”मैं अपनी पहली मां (माधवी) को ही मां मानती हूं। डॉ. आयुषी को नहीं। मुझे आयुषी से बाबा की शादी की भी जानकारी नहीं थी। मुझे शादी के बारे में बताया तक नहीं। मेरी मां का दर्जा कोई नहीं ले सकता।” विनायक ने कहा, ”महाराज को कुछ ट्रस्टियों के छोड़े जाने और मकान के कर्ज को लेकर भी तनाव था। आयुषी को उन्होंने नौकरी पर रखने के साथ आश्रम के ट्विटर हैंडल की जिम्मेदारी दी थी। इसी के बाद शादी हुई।”