धूल भरी आंधी की वजह से दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना हो गया है मुश्किल

नई दिल्ली. पश्चिम भारत की धूल भरी आंधी की वजह से दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। दिल्ली में हवा की गुणवत्ता आज तीसरे दिन भी खतरनाक स्तर पर है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगले तीन-चार दिन तक धूल भरी आंधी चल सकती है तथा लोगों को लंबे समय तक घर से बाहर ना रहने की सलाह दी गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि पश्चिमी भारत खासतौर से राजस्थान में धूल भरी आंधी चलने के कारण हवा की गुणवत्ता एकदम खराब हो गई है। हवा में मोटे कणों की मात्रा बढ़ गई है। दिल्ली-एनसीआर में पीएम 10 (10 मिलीमीटर से कम मोटाई वाले कणों की मौजूदगी) का स्तर 796 और केवल दिल्ली में 830 है जिससे हवा में घुटन – सी हो गई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आंधी की वजह से धूल भरी हवाएं अब भी राजस्थान से आ रही हैं, इसलिए कुछ दिनों तक यह स्थिति बनी रह सकती है। सिर्फ तूफान और बारिश ही इनसे राहत दिला सकते हैं, जिनके आसार तुरंत नहीं हैं। गुरुवार की सुबह पीएम 2.5 का स्तर 83 और पीएम 10 का स्तर 262 पर दर्ज किया गया। पीएम 10 अभी भी खराब स्तर पर बना हुआ है। पीएम 10 का स्तर 200 के पार होते ही हवा की गुणवत्ता सांस लेने लायक नहीं रहती। दिल्ली एनसीअर में आलम ये है कि पीएम 10 का स्तर 200 से कहीं ज्यादा पहुंच चुका है। लोधी रोड इलाके में काफी पेड़-पौधे होने के बावजूद पीएम 10 का स्तर 200 से कहीं ज्यादा होना काफी चिंताजनक है। दिल्ली एनसीआर के बाकी कई इलाकों में ये स्तर और भी खराब बताया जा रहा है।

सीपीसीबी के अनुसार, दिल्ली में कई स्थानों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 500 के निशान से पार है। पूर्वी दिल्ली के आनंद विहार इलाके में आज सुबह पीएम 10 का स्तर 929 और पीएम 2.5 का स्तर 301 मापा गया।
गौरतलब है कि 0 से 50 के बीच के वायु गुणवत्ता सूचकांक को ” अच्छा माना जाता है , 51-100 के बीच को ” संतोषजनक , 101-200 के बीच को ” मध्यम , 201-300 को ” खराब , 301-400 को ” बहुत खराब और 401-500 ” खतरनाक माना जाता है।  क्षेत्र में चल रही हवा से धूल के कण लगातार वायु में फैल रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार , दिल्ली में आज 35 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का अनुमान है। धूल से भरी हवाओं ने कल से दिल्ली – एनसीआर की आबोहवा में घुटन पैदा कर रखी है।

पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि अगले तीन दिन तक धूल भरी हवाएं चलने का अनुमान है। उसने निर्माण एजेंसियों , नगर निगमों और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को पानी का छिड़काव सुनिश्चित करने के लिए अलर्ट किया है।  सीपीसीबी ने कहा कि इस बार गर्मियों में प्रदूषण पिछले साल से काफी अलग है। नवंबर में दिल्ली – एनसीआर क्षेत्र में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर बढ़ गया था जिससे स्थानीय निवासियों का सांस लेना दूभर हो गया था।

बहरहाल , इस बार प्रदूषण का स्तर बढ़ने के पीछे हवा में मोटे कणों की मात्रा बढ़ना वजह है। इस बार हवा में घुले खतरनाक सूक्ष्म कण पीएम 2.5 का स्तर उतना अधिक नहीं है जितना पिछले साल नवंबर में था। ये कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि फेफड़ों में घुसकर उस पर असर डाल सकते हैं।  सीपीसीबी के सदस्य सचिव सुधाकर ने स्थानीय निवासियों को चेतावनी दी है कि अगले तीन – चार दिन का प्रदूषण का स्तर ऐसा ही रह सकता है तथा उन्होंने लोगों से तीन से चार घंटे से ज्यादा बाहर ना रहने का अनुरोध किया है।

सुधाकर ने कहा , ” प्रदूषण के कारण सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। हमने निर्माण कंपनियों की बैठक भी बुलाई है और अगर हालात इतने बदतर रहे तो हम निर्माण गतिविधियां रोक देंगे। हालांकि, गुरुवार को हालात बुधवार से बेहतर दिखाई दिए लेकिन अभी भी हवा की गुणवत्ता सांस लेने लायक नहीं है। आपको बता दें कि बुधवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से आई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर इलाके में पीएम 10 का स्तर 778 पर अत्यंत गंभीर से ऊपर था। दिल्ली में यह विशेषकर 824 पर था। इसी कारण धुंध की स्थिति बनी हुई थी, जिसका असर विजिबिलिटी पर भी पड़ा।

यूपी में 10 की मौत
बुधवार को उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में धूल भरी आंधी चली। इस आंधी में 10 लोगों की मौत हो गई। जिसमें 3 लोग गोंडा, एक फैजाबाद और 6 लोग सीतापुर के शामिल हैं

मौसम विभाग के निदेशक डॉ. रंजीत सिंह के अनुसार धूल भरी हवाओं की रफ्तार कम है। यदि यह आंधी तूफान का स्वरूप लेती हैं, तो फिर यह धूल दूर तक उड़ जाएगी। दूसरा, बारिश होने से यह छंट सकती है। लेकिन अभी न तो आंधी-तूफान के आसार हैं और न ही बारिश के। इसलिए अगले दो दिनों तक इससे राहत के आसार नहीं दिख रहे।

विशेषज्ञों के अनुसार हवा में धूलकण घुल गए हैं इसलिए इससे घुटन महसूस हो रही है। ज्यादा उम्र के लोगों और बीमारों के लिए यह खतरनाक है। जो लोग स्वस्थ हैं, उन्हें भी धूलकण नुकसान पहुंचा सकते हैं। दूसरा, नुकसान यह है कि धूल की परत के कारण धरती के गर्म होने के कारण उत्पन्न होने वाला विकिरण ऊपर तक नहीं उठ पा रही है। नतीजा यह है कि रात का तापमान ज्यादा गर्म रहेगा। हालांकि, दिन में धूल की परत के कारण सूरज की सीधी चुभन कम है किन्तु गर्मी का अहसास ज्यादा हो रहा है।

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