2 जून को पाकिस्तान से लड़ते शहीद हुए विजय पांडेय, 20 जून को होनी थी शादी

जम्मू। सीमा पर पाकिस्तान से शनिवार देर रात हुए मुठभेड़ में यूपी के लाल विजय के शहीद होने की सूचना मिलते ही पूरे गांव में कोहराम मच गया। शहीद के परिवार को ढांढस बंधाने वालों का घर में तांता लग गया। शहीद का शव सोमवार को गांव लाया जाएगा। फतेहपुर जिले के सठिगंवा गांव निवासी राजू पांडेय किसान हैं। उनका बेटा विजय कुमार पाण्डेय बीएसएफ में जवान थे। वर्तमान में विजय की पोस्टिंग 33वीं बटेलियन बीएसएफ में थी।

वह जम्मू कश्मीर के अखनूर सेक्टर में तैनात थे। सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से भारी गोलाबारी की गई। इस घटना में विजय और उनके एक साथी सत्य नारायण यादव शहीद हो गए। बीएसएफ की तरफ से देर रात विजय के परिजनों को सूचना दी गई। गांव में सूचना मिलते ही कोहराम मच गया। विजय के घर से रोने और चिल्लाने की आवाज सुनकर अन्य ग्रामीण वहां इकट्ठा हो गए।

विजय के परिवार में पिता के अलावा एक बड़ा भाई अजय पाण्डेय हैं जो नगर निगम कानपुर में क्लर्क हैं। विजय की शुरुआती पढ़ाई गांव के ही प्राइमरी विद्यालय से हुई थी। उसके बाद उन्होंने आदर्श इंटर कॉलेज सालेपुर से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। कानपुर के डिग्री कॉलेज में इन्होंने पढ़ाई शुरू की थी उसी दौरान बीएसएफ में तैनाती हो गई। 4 जुलाई 2012 को विजय बीएसएफ में भर्ती हुए थे।
शहीद जवान विजय पाण्डेय की 20 जून को शादी होनी थी। 15 जून को उनका तिलक था। इसके लिए शहीद ने छुट्टी के लिए आवेदन भी कर रखा था जो मंजूर हो चुका था। विजय 5 जून से छुट्टी पर घर आने वाला था। शादी की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं।

फोन पर मां को मिली बेटे के शहीद होने की सूचना : घटना के बाद बीएसएफ की तरफ से फोन किया गया तो विजय की मां सविता देवी ने फोन उठाया। बेटे के शहीद होने की पहली सूचना मां को मिली। सूचना मिलते ही सविता देवी के हाथ से फोन गिरा और वह खुद रोते हुए जमीन पर बैठ गई। जिसके बाद अन्य परिजनों को घटना की जानकारी हो सकी।