आप-कांग्रेस में अचानक मेल-मिलाप को लेकर राजनीति का बाजार गर्म

नई दिल्ली। राजधानी में लगातार एक दूसरे के खिलाफ खड़ी ‘आप’ और कांग्रेस में अचानक मेल-मिलाप की खबरों को लेकर राजनीति का बाजार गर्म हो गया है। माना जा रहा है कि यह सारा खेल कांग्रेसी वोटरों को लेकर हो रहा है। कांग्रेस को लग रहा है कि उसका वोटर उसके पास लौटकर आ रहा है, तो बीजेपी के वोटों में सेंध लगाने के लिए आप और कांग्रेस एक हो रहे हैं। वैसे इस गठबंधन को लेकर लोकल कांग्रेसी नेता विरोध में हैं, लेकिन माना जा रहा है कि ऊपरी स्तर पर कुछ न कुछ खिचड़ी पक रही है।

दिल्ली के राजनैतिक गलियारों में एक महीने पहले यह खबर चली थी कि लोकसभा चुनाव के दौरान आप और कांग्रेस को लेकर समझौता हो सकता है। इनमें दिल्ली की सात लोकसभा सीटों में से आप चार सीटों पर और कांग्रेस तीन सीटों पर सहमत हो सकती हैं। लेकिन बात आई-गई हो गई। अब यह खबरें दोबारा फैलीं, तो प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने तुरंत इसका खंडन कर दिया और कहा कि लोग आप को नकार रहे हैं, इसलिए हम आगे क्यों आएंगे। आप नेता दिलीप पांडे कह रहे हैं कि कांग्रेस के बड़े नेता हमारे नेताओं से मिलकर इस गठबंधन को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि गरज तो कांग्रेस को है।

हालांकि आंकड़ों की तो माने तो दिल्ली में हुए चुनावों में कांग्रेस का वोट प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है। इसलिए दिल्ली कांग्रेस के नेता दावा कर रहे हैं कि आगामी चुनाव में आप का बंटाधार होने वाला है, इसलिए संधि की बात फैलाई जा रही है। अगर पिछले चुनावों में कांग्रेस के वोट प्रतिशत की बात करें, तो 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत लगभग 25 था, जो साल 2015 के दोबारा हुए विधानसभा चुनाव में घटकर करीब 9 प्रतिशत रह गया। लेकिन पिछले साल हुए नगर निगमों के चुनाव पर नजर दौड़ाएं, तो इस चुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत 9 से बढ़कर 21 प्रतिशत हो गया। कांग्रेस इस आंकड़े से गदगद है।

वोटों का यही प्रतिशत अगर आम आदमी पार्टी को लेकर देखा जाए तो पिछले विधानसभा चुनाव में उसका यह प्रतिशत 54 था, जिसके चलते पार्टी ने 70 में से 67 सीटें जीती थी। लेकिन पिछले साल निगम चुनाव में उसका यह मत प्रतिशत लुढ़ककर 26 प्रतिशत पर आ गया। इसलिए कांग्रेसी लगातार कह रहे हैं हमारा वोटर वापस आ रहा है और जो वोट आप को चले गए थे वह लौट रहे हैं। इसलिए वे दावा कर रहे हैं कि हम नहीं बल्कि आप नेता गठबंधन चाहते हैं।

अगर इस आंकड़ेबाजी में बीजेपी का वोट प्रतिशत देखा जाए, तो उसमें लगातार इजाफा हो रहा है। साल 2013 के विधानसभा चुनाव में उसका वोट प्रतिशत 31 था जो 2015 के विधानसभा चुनाव में एक प्रतिशत बढ़ गया, लेकिन उसकी सीटें मात्र तीन रह गईं। पिछले साल हुए निगम चुनाव में बीजेपी का यही वोट प्रतिशत एक बार फिर से बढ़कर 38 प्रतिशत तक जा पहुंचा है। यानी बीजेपी को अपने वोटरों को लेकर चिंता नही है। तभी तो प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा है कि लोकसभा चुनाव को लेकर दोनों पार्टियां बेचैन हैं, क्योंकि दिल्ली के लोगों की अभी भी पहली पसंद बीजेपी है।