मुद्रा योजना : 12 करोड़ लोगों को छह लाख करोड़ रपए का ऋण दिया जा चुका है : मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मोदी ने बैंकों से बड़ी रकम कर्ज पर लेकर देश से भाग जाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि गरीब लोग ऋण चुकाकर सम्मान की जिंदगी जीना जानते हैं। प्रधानमंत्री के निशाने पर शायद विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे कई बड़े लोग थे। प्रधानमंत्री ने मोदी ऐप के जरिये मुद्रा योजना के लाभार्थियों से सीधे बातचीत करते हुए उनके अनुभव सुने और आगे बढ़ने के मंत्र दिए। मोदी ने कहा कि पिछली सरकारों में ऋण उन्हें ही मिलता था जिनकी पहचान होती थी। पिछली सरकारों में मुख्यमंत्री अथवा वित्त मंत्री अपने पसंद के उद्यमियों को ऋण दिलवाने के लिए फोन कर सिफारिश करते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने छोटे उद्यमियों और उनकी कारोबारी कुशलता पर भरोसा कर ऋण दिया। मुद्रा योजना से ऋण लेकर छोटे उद्यमियों ने न केवल स्वरोजगार शुरू किया अपितु रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी योगदान किया और कई-कई लोगों को अपने कारोबार से जोड़कर काम दिया। इस योजना के तहत 12 करोड़ लोगों को छह लाख करोड़ रपए का ऋण दिया जा चुका है। मुद्रा योजना के कुल लाभार्थियों में आधे से अधिक 55 प्रतिशत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के है। मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना के तहत सबसे अधिक ऋण महिलाओं, गरीब और दलित लोगों को दिया गया है। कुल ऋण में से 28 प्रतिशत ऋण उन लोगों को दिया गया जिन्होंने पहली बार कारोबार शुरू किया है। करीब डेढ़ घंटे के प्रधानमंत्री से सीधे वार्तालाप में मुद्रा योजना के लाभार्थियों ने ऋण लेकर कारोबार शुरू करने और विस्तार करने के अपने अनुभव साझे किए। प्रधानमंत्री ने ऋण लेने वालों से यह भी जानना चाहा कि कर्ज लेने के लिए उन्हें बिचौलियों की शरण में तो नहीं जाना पड़ा और किसी प्रकार की रिश्वत तो नहीं देनी पड़ी।

पहले शुरू होती योजना : मुद्रा योजना दस वर्ष पहले शुरू होती तो शहरीकरण रुक गया होता मोदी ने कहा कि यदि मुद्रा योजना जैसी स्कीम को 10 वर्ष पहले शुरू किया जाता तो वर्तमान में शहरीकरण की समस्याओं से निपटने में इतनी अधिक चुनौतियां का सामना नहीं करना पड़ता। मोदी ने कहा अगर इस योजना को काफी पहले शुरू कर दिया जाता तो गांवों में अपने वृद्व माता-पिता और परिवारों को छोड़कर शहरों में आने वाले युवकों की संख्या में कमी आ सकती थी। (एजेंसियां)