सीतापुर में कुत्तों का आतंकः प्रशासन और वन विभाग की तमाम कोशिशों के बाद भी हालात काबू में नहीं

नई दिल्ली. यूपी के सीतापुर में आदमखोर हो जाने के शक में कुत्तों का एनकाउंटर करने के बाद भी बच्चों पर हमलों का सिलसिला बदस्तूर जारी है. पुलिस, प्रशासन और वन विभाग की तमाम कोशिशों के बाद भी हालात काबू में नहीं आ रहे. लिहाज़ा अब प्रशासन ने एनकाउंटर के बाद कुत्तों के नसबंदी की मुहिम चला दी है.

पूरे सीतापुर में इन दिनों आदमखोर कुत्तों को लेकर जिला प्रशासन लाउडस्पीकर के माध्यम से एलान करा रहा है. जिसमें लोगों को कुत्तों से बचने की सलाह दी गई है. उपाय बताए गए हैं. बच्चों को घरों में रखने की बात कही गई है. सावधान रहने के लिए कहा गया है.

महीने भर से मशकक़्त की जा रही है. 164 अधिकारियों की टीम को काम पर लगाया गया है. वन विभाग, पुलिस और अन्य एक्सपर्ट की टीमें इस मामले को लेकर काम कर रही हैं. बावजूद इसके 14 बच्चों की मौत हो चुकी है. 50 से ज़्यादा संदिग्ध आरोपी कुत्तों का एनकउंटर किया गया है. लेकिन ऑपरेशन ‘डॉग’ का नतीजा ज़ीरो ही दिख रहा है.

कैमरे से बाहर निकल कर सीतापुर में संदिग्ध आदमखोर कुत्तों को लेकर प्रशासन कितना संजीदा हैं, ये जानने के लिए इन तीन बातों को देखना और समझना जरूरी हैं, क्योंकि इन्हीं तीन बातों के जरिए आप समझ सकेंगे कि सीतापुर में बच्चों पर हमला करने वाला आखिर है कौन? कुत्ता…जंगली कुत्ता, भेड़िया या फिर कोई और?

सीतापुर की डीएम यानी जिलाधिकारी ने सीतापुर के उन गांवों में पोस्टर लगवाए हैं, जहां संदिग्ध आदमखोर कुत्तों का सबसे ज्यादा आतंक है. सीतापुर की डीएम की ही तरफ से जारी प्रेस रीलीज में जनता तक सूचना पहुंचाने की गुजारिश कि गई है. और इसी दौरान जानवरों के अधिकार और उनकी रक्षा से जुडी एक संस्था भी सामने आई है. जिस संस्था का जिक्र खुद डीएम ने अपनी प्रेस रिलीज में भी किय़ा है.

अब आइए शुरूआत पोस्टर से करते हैं. इस पोस्टर में साफ-साफ लिखा है कि सीतापुर और उसके आसपास के गांवों में जो बच्चे मारे गए या घायल हुए उन सबके पीछे जंगली कुत्तों का हाथ है. वो जंगली कुत्ते ही हैं, जो बच्चों पर हमला कर रहे हैं. पोस्टर के माध्यम से इन जंगली कुत्तों से सावधान रहने के तमाम उपाय भी लोगों को बताए गए हैं.

पोस्टर के बाद अब इस प्रेस रिलीज पर गौर कीजिए. 17 मई को जारी इस प्रेस रिलीज मे डीएम ने दावा किया है कि सीतापुर जनपद में अब तक बच्चों पर हमले की जितनी भी घटनाएं हुई हैं, उनके लिए सिर्फ और सिर्फ जंगली कुत्ते ही जिम्मेदार हैं. ये भेड़िए या किसी और जानवर का काम नहीं है.

अपने दावे के साथ जिलाधिकारी ने बाकायदा प्रेस रिलीज में एक संगठन का हवाला भी दिया है. उनका कहना है कि वाइल्ड लाइफ इंसटीट्यूट ऑफ इंडिया और ह्यूमन सोसायटी ऑफ इंडिया ने ये स्पष्ट किया है कि हमलावर कोई और नहीं बल्कि जंगली कुत्ते हैं.

मगर उसी ह्यूमन सोसायटी ऑफ इंडिया की तरफ से एक पत्र जारी किया गया है. जिसका जिक्र जिलाधिकारी ने किया है. जिलाधिकारी के प्रेस रिलीज जारी करने के अगले दिन ही ह्यूमन सोसायटी ऑफ इंडिया ने उन्हें पत्र लिख कर बाकायदा आपत्ति जताते हुए कहा है कि उन्होंने कभी भी ऐसा नहीं कहा कि बच्चों पर हमला करने वाले जंगली कुत्ते ही हैं.

तो अब तक तो आप समझ ही चुके होंगे कि सीतापुर प्रशासन संदिग्ध आदमखोर कुत्तों के मामले की जांच कैसे कर रहा है? आप ये भी जान गए होंगे कि पूरी ताकत झोंकने के बाद भी अब तक यहां के लोगों को इस दहशत से निजात क्यों नहीं मिल पा रही?

कमाल की बात तो ये है कि आजतक की टीम जब सीतापुर के अलग-अलग गांवों में पहुंची थी, तब हमें वहां कहीं भी पुलिस की कोई टीम गश्त पर नजर नहीं आई. लोगों को कहना था कि कई बार तो ऐसा भी हुआ कि कोई कुत्ता दिखाई दिया तो लोग खुद उसके पीछे लाठी-डंडा लेकर भागे. जबकि पुलिस वाले बस लोगों के पीछे दर्शक की तरह खड़े थे. वैसे इसके लिए यूपी पुलिस को जिम्मेदार ठहराना भी शायद ठीक नहीं होगा. कहां पेशेवर अपराधियों से निपटने और उनका एनकाउंटर करने वाली पुलिस और कहां कुत्तों के पीछे भागना.