तीन में से एक किशोरी जीती है यौन उत्पीड़न के खौफ में

नई दिल्ली। एक अध्ययन के अनुसार भारत में हर तीन में से एक किशोरी सार्वजनिक स्थानों पर यौन उत्पीड़न को लेकर चिंतित रहती है जबकि पांच में से एक किशोरी बलात्कार सहित अन्य शारीरिक हमलों को लेकर डर के साए में जीती है। यह सव्रेक्षण गैर सरकारी संगठन ‘‘सेव द चिल्ड्रेन’ द्वारा कराया गया है, जिसे मंगलवार को यहां इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जारी किया।

संस्था ने यह आंकड़े ‘‘ंिवग्स 2018 र्वल्ड ऑफ इंडियाज गर्ल्स’ नामक सव्रेक्षण के माध्यम से जुटाए हैं और यह सार्वजनिक स्थानों पर लड़कियों की सुरक्षा को लेकर धारणा पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की दो तिहाई लड़कियों ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न की स्थिति में अपनी मां पर भरोसा करेंगी। पांच में से करीब दो लड़कियों ने कहा कि अगर उनके अभिभावकों को सार्वजनिक स्थल पर उत्पीड़न की किसी घटना का पता चलेगा तो वे उनके घर से बाहर निकलने पर रोक टोक करेंगे। 25 फीसद लड़कियों को लगता है कि उनका शारीरिक शोषण और बालात्कार भी हो सकता है।

रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि 40 प्रतिशत लड़कियों को लगता है कि पुलिस उन्हें गंभीरता से नहीं लेगी या उल्टा उन पर ही आरोप लगाया जाएगा। इस अध्ययन में करीब 4000 किशोर और किशोरियों तथा उनके 800 अभिभावकों को शामिल किया गया। यह सव्रेक्षण छह राज्यों के 30 शहरों और 84 गांवों में कराया गया। सव्रेक्षण में दिल्ली – एनसीआर, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, असम और मध्य प्रदेश को शामिल किया गया। पुरी ने कहा कि मैं सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा के सम्बंध में लड़कियों की धारणा के बारे में इस अध्ययन के जारी होने से खुश हूं। आर्थिक प्रगति से महिलाओं को मिलने वाले अवसर बढ़ते हैं। हालांकि व्यक्तिगत सुरक्षा की चिंता इस प्रगति में बाधा बनती है। उन्होंने कहा कि ऐसे अध्ययन बताते हैं कि इस पर जमीनी स्तर पर कार्य होना चाहिए। भारत में सेव द चिल्ड्रेन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी बिदिशा पिल्लई ने कहा कि यह अध्ययन घर से बाहर निकलते समय भारतीय लड़कियों के डर को सामने लाता है।