अब विमान में करिए मोबाइल पर बात, टेलीकॉम कमीशन ने लगाई मुहर

नई दिल्ली। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विमानों में सफर के दौरान यात्री अब मोबाइल पर बात करने के साथ ही इंटरनेट का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। दूरसंचार आयोग ने उड़ान के दौरान मोबाइल सेवा ‘‘कनेक्टिविटी’ को मंगलवार को सशर्त मंजूरी दे दी। टेलीकॉम रेग्युलेटर अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने इसके लिए सरकार से सिफारिश की थी। इसके अलावा टेलीकॉम सेक्टर की शिकायतों से निपटने के लिए एक लोकपाल की नियुक्ति भी की जाएगी। नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने दूरसंचार आयोग के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि भारतीय उड़ानों के लिहाज से दिलचस्प समय आने वाला है, क्योंकि दूरसंचार आयोग ने भारतीय वायुक्षेत्र में डेटा एवं वॉयस सेवाओं को मंजूरी दे दी है।’ उन्होंने कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि प्रस्ताव पर ‘‘जल्द से जल्द कार्यान्वयन हो’ क्योंकि सरकार विमान यात्रियों के लिए सेवाएं सुधारने एवं उनकी यात्रा को खुशनुमा एवं बाधामुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सूत्रों के मुताबिक, सेवाओं के लिए शुल्क तय करना संबंधित एयरलाइंसों पर निर्भर करेगा। गृह मंत्रालय पहले ही इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है। दूरसंचार सचिव अरु णा सुंदरराजन ने बताया कि दूरसंचार आयोग के फैसले के बाद अब भारतीय एयर स्पेस में वॉयस, डेटा कॉल और इंटरनेट सर्फिंग की सुविधा दी जाएगी। इस फैसले से टेलीकॉम सेक्टर में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की तरफ से लगभग सभी सिफारिशें मान ली गई हैं। हम इस प्रक्रिया में तेजी ला रहे हैं और तीन-चार महीने में यह तैयार हो जाएगा। हम तुरंत इस निर्णय को लागू करेंगे। उन्होंने कहा कि मौजूदा वक्त में विभाग को हर तिमाही में टेलीकॉम सेक्टर से जुड़ी करीब 1 करोड़ शिकायतें मिलती हैं। ऐसे में दूरसंचार आयोग ने बेहतर उपभोक्ता शिकायत निवारण पण्राली के लिए लोकपाल गठित करने को भी मंजूरी दी है। लोकपाल ट्राई के तहत स्थापित किया जाएगा और इसके लिए एक्ट में संशोधन करना होगा। नए तंत्र के गठन से उपभोक्ताओं की शिकायतों का बेहतर और संतोषजनक निपटारा होगा।

उपग्रह के इस्तेमाल की सिफारिश नहीं मानी : अरु णा सुंदरराजन ने कहा कि हालांकि इस तरह की सेवाओं में उपग्रह के इस्तेमाल के बारे में ट्राई की सिफारिश को स्वीकार नहीं किया गया है। ट्राई ने ‘‘इन-फ्लाइट’ मोबाइल संचार सेवाओं के लिए विदेशी उपग्रह फर्मों को अनुमति देने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि ‘‘इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी’ प्रदाता को दूरसंचार विभाग से लाइसेंस लेना होगा। सेवा देने के लिये उसे एक रुपये की सालाना लाइसेंस फीस देनी होगी। सुंदरराजन ने कहा कि टेलीफोनी कॉल को फोन नंबर से सम्बद्ध करने की ट्राई की सिफारिश भी नहीं मानी गई।

मोबाइल एप से किसी फोन या मोबाइल पर कॉल करने की अस्पष्टता होगी समाप्त: इस मंजूरी से मोबाइल एप से किसी फोन या मोबाइल पर कॉल करने को लेकर अस्पष्टता समाप्त होगी। ट्राई के प्रस्ताव के अनुसार जिन कंपनियों के पास वैध दूरसंचार लाइसेंस हैं वे एप आधारित कॉलिंग सेवाएं दे सकती हैं और इसमें वाइफाई का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। सेवा प्रदाताओं को निगरानी संबंधी सभी जरूरतों को पूरा करना होगा। इस तरह की कॉल के लिए शुल्क दूरसंचार कंपनी लेगी और सामान्य कॉल के सभी नियम इस पर लागू होंगे। (एजेंसियां)