लखनऊ पहुंचे अमित शाह, राजभर से होगी मुलाकात

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में कई चुनौतियों से घिरी योगी सरकार को नई दिशा दिखाने के लिए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह आज लखनऊ पहुंच चुके हैं. लखनऊ समता मूलक चौराहे पर ज्योतिबा फूले की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. वहीं बीजेपी के सहयोगी पार्टी सोहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर से शाम 5 बजे मुलाकात होगी. राजभर को मुख्यमंत्री आवास पर मुलाकात के लिए बुलाया गया है. इस वक्त शाह मुख्यमंत्री आवास कालीदास मार्ग पर ही बैठक कर रहे हैं.
शाह करीब 12.30 लखनऊ पहुंचे, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एयरपोर्ट पर शाह को रिसीव करने भी पहुंचे. शाह प्रदेश संगठन और सरकार को लेकर मंथन करेंगे. पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार-विमर्श करेंगे. आज ही देर रात दिल्ली वापस चले जाएंगे.
अमित शाह का दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब पार्टी और सरकार के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी हुई हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर शाह का दौरा काफी महत्वपूर्ण है. पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के सत्ता में आने के पीछे यूपी की अहम भूमिका रही है.
उत्तर प्रदेश की 13 विधान परिषद सीटों पर चुनाव की घोषणा हो चुकी है. 13 में से 11 सीटों पर बीजेपी की जीत तय है. बीजेपी ने अपने उम्मीदवार अभी तक घोषित नहीं किए हैं. ऐसे में विधान परिषद के नामों को लेकर भी शाह पार्टी नेताओं के साथ मंथन कर सकते हैं.
मोदी सरकार के चार साल पूरे हो रहे हैं और योगी सरकार के एक साल पूरे हो चुके हैं. बीजेपी के अंदर और बाहर दोनों जगह से चुनौतियां मिल रही हैं. माना जा रहा है कि शाह अपने दौरे से पार्टी में बढ़ते असंतोष को दबाने का वह नया फॉर्मूला दे सकते हैं.
सूबे के करीब चार दलित सांसदों ने बगावत का रुख अख्तियार कर रखा है. इसके अलावा पार्टी के कुछ विधायकों में भी असंतोष की बातें सामने आ रही हैं. इसके अलावा सहयोगी दलों में नाराजगी सामने आई है. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी नाराज हैं. राज्यसभा चुनाव से पहले दिल्ली में शाह से मिले थे.
मंत्रिमंडल में फेरबदल
माना जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए योगी सरकार के मंत्रिमंडल में भी फेरबदल हो सकता है. शाह के दौरे से मंत्रियों की धड़कने तेज हो गई हैं. योगी सरकार के कुछ मंत्रियों का पत्ता कट सकता है. सपा-बसपा के गठबंधन को देखते हुए दलित और ओबीसी मंत्रियों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है.